- 15 वर्षीय किशोरी और 75 वर्षीय बुजुर्ग के दोनों पैरों की शक्ति थी लगभग शून्य
- 4 से 6 घंटे चली जटिल सर्जरी के बाद पैरों में दिखा सुधार
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में न्यूरोसर्जरी विभाग ने स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर के दो जटिल मामलों की सफल सर्जरी कर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। खास बात यह रही कि दोनों मरीज ऑपरेशन से पहले गंभीर न्यूरोलॉजिकल कमजोरी से जूझ रहे थे और उनके दोनों पैरों की शक्ति लगभग शून्य हो चुकी थी। चलने में असमर्थ 15 वर्षीय किशोरी और 75 वर्षीय बुजुर्ग मरीज में सफल सर्जरी के बाद पैरों की शक्ति में सुधार देखने को मिला है। दोनों मरीजों की जांच के दौरान स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर की पुष्टि हुई थी, जिसके कारण उनकी पैरों की शक्ति बुरी तरह प्रभावित हो गई थी। न्यूरोसर्जन डॉ. अखिलेश जोशी के नेतृत्व में दोनों मरीजों की जटिल सर्जरी की गई। प्रत्येक ऑपरेशन में करीब चार से छह घंटे का समय लगा। सर्जरी के बाद दोनों मरीजों की न्यूरोलॉजिकल स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया और अब वे पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं तथा चलने-फिरने की दिशा में सुधार कर रहे हैं।
डॉ. अखिलेश जोशी ने बताया कि स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर की सर्जरी बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण होती है। ट्यूमर के आसपास महत्वपूर्ण नसें और स्पाइनल कॉर्ड मौजूद रहते हैं, ऐसे में सर्जरी के दौरान ट्यूमर को सुरक्षित तरीके से निकालने के साथ-साथ स्पाइनल कॉर्ड और नसों को संरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है। अस्पताल में हुई इन दोनों जटिल सर्जरी को कुमाऊं क्षेत्र के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे गंभीर न्यूरोसर्जिकल समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों के अस्पतालों का रुख करने की जरूरत कम हो सकती है और क्षेत्र में ही उन्नत न्यूरोसर्जिकल उपचार की सुविधा उपलब्ध होने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। दो अलग उम्र के इन दोनों मरीजों के लिए बीमारी ने चलने की क्षमता लगभग छीन ली थी, लेकिन सफल सर्जरी के बाद अब पैरों की शक्ति में सुधार की शुरुआत हुई है। अस्पताल की न्यूरोसर्जरी टीम की यह उपलब्धि गंभीर स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर से जूझ रहे मरीजों के लिए उपचार की नई उम्मीद लेकर आई है।




