- 2800 करोड़ की प्रस्तावित परियोजना में काठगोदाम, रानीबाग, भुजियाघाट, ज्योलीकोट और हनुमानगढ़ी बनेंगे स्टेशन, कैंची धाम को भी जोड़ा जाएगा
हल्द्वानी। नैनीताल जाने वाले पर्यटकों और कैंची धाम के श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर है।काठगोदाम-हनुमानगढ़ी-कैंची धाम रोपवे परियोजना को गति देने के लिए बुधवार को काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस में प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में काठगोदाम और ज्योलीकोट से कैंची धाम को भी रोपवे नेटवर्क से जोड़ने का निर्णय लिया गया। प्रस्तावित रोपवे से रानीबाग से हनुमानगढ़ी का सफर करीब 20 से 25 मिनट में पूरा होने का अनुमान है। बैठक में बताया गया कि काठगोदाम-नैनीताल रोपवे परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2800 करोड़ रुपये होगी। करीब 14.9 किलोमीटर लंबे रोपवे मार्ग में काठगोदाम, रानीबाग, भुजियाघाट, ज्योलीकोट और हनुमानगढ़ी स्टेशन प्रस्तावित हैं। परियोजना में कुल 58 टावर लगाए जाने हैं। रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक एकतरफा यात्रा का प्रस्तावित किराया 375 रुपये प्रति व्यक्ति बताया गया है, जबकि रोपवे की क्षमता करीब 1800 यात्रियों प्रति घंटे की होगी।

परियोजना को कैंची धाम तक विस्तार देने के लिए ज्योलीकोट स्टेशन को जंक्शन स्टेशन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। यहां से कैंची धाम के लिए अलग रोपवे कनेक्शन तैयार किया जाएगा। इससे देशभर से कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं को वैकल्पिक परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। रोपवे तक यात्रियों की आसान पहुंच के लिए काठगोदाम रेलवे स्टेशन से रोडवेज परिसर तक करीब 250 मीटर लंबा फुट ओवर ब्रिज बनाने की योजना भी है। इसके साथ ही काठगोदाम और आसपास पार्किंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि बाहर से आने वाले पर्यटक अपने वाहन पार्क कर रोपवे के माध्यम से नैनीताल की ओर जा सकें। प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हनुमानगढ़ी रोपवे स्टेशन पर यातायात का अतिरिक्त दबाव न बढ़े, इसके लिए पहले से समुचित यातायात एवं पार्किंग प्लान तैयार किया जाए। रानीबाग में प्रस्तावित स्टेशन के स्थलीय निरीक्षण के दौरान उन्होंने बताया कि वहां करीब 33 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जहां रोपवे स्टेशन के साथ पार्किंग विकसित करने की संभावना है। उन्होंने वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित प्रक्रियाओं को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि रोपवे बनने से काठगोदाम, हल्द्वानी और रानीबाग से नैनीताल की ओर जाने वाले पर्यटकों को सड़क के अलावा एक वैकल्पिक परिवहन सुविधा मिलेगी। पर्यटन सीजन और छुट्टियों के दौरान नैनीताल की सड़कों पर बढ़ने वाले वाहनों के दबाव और पार्किंग की समस्या को कम करने में भी परियोजना मददगार हो सकती है। इसके साथ ही होटल, होम-स्टे, रेस्टोरेंट, टैक्सी और अन्य पर्यटन कारोबार से जुड़े स्थानीय व्यवसायों को पर्यटकों की बढ़ी आवाजाही का लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हल्द्वानी से नैनीताल तक का पर्वतीय क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील है। ऐसे में परियोजना का तकनीकी अध्ययन पूरा होने के बाद ही निर्माण की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख सचिव ने एनएचएलएमएल और संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से परियोजना की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में सचिव लोक निर्माण विभाग एवं अन्य विभागों के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, प्रभागीय वनाधिकारी आकाश गंगवार, अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल, एनएचएलएमएल के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रशांत जैन, उपजिलाधिकारी मोनिका सहित लोक निर्माण, विद्युत, वन और सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।




