हल्द्वानी। 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी में हुई हिंसा के बाद गिरफ्तार किए गए सभी 101 आरोपियों को जमानत मिल गई है। इस घटनाक्रम को लेकर जमीयत उलेमा हल्द्वानी ने इसे कानूनी संघर्ष और सामूहिक प्रयासों की बड़ी सफलता बताते हुए राहत और संतोष व्यक्त किया है। संगठन ने दावा किया कि गिरफ्तार लोगों में से 88 आरोपियों के मुकदमे जमीयत उलेमा की ओर से लड़े गए, जिनकी रिहाई लगातार कानूनी प्रयासों और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से संभव हो सकी। हल्द्वानी हिंसा प्रकरण में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। 8 फरवरी 2024 की घटना के बाद गिरफ्तार किए गए सभी 101 लोगों को जमानत मिल चुकी है। इस संबंध में जमीयत उलेमा हल्द्वानी के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद आसिम ने एक बयान जारी कर इसे अहल-ए-हल्द्वानी के लिए राहत और शुक्रगुजारी का दिन बताया है। मौलाना आसिम ने कहा कि गिरफ्तार किए गए 101 लोगों में से 88 व्यक्तियों के मुकदमे जमीयत उलेमा ने लड़े। उन्होंने दावा किया कि संगठन की लगातार कानूनी लड़ाई, पैरवी और सहयोग के चलते इन लोगों की रिहाई का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने बताया कि हाल ही में अंतिम बंदी मोहम्मद शहजाद उर्फ कंखड़ा को भी जमानत मिलने के बाद सभी गिरफ्तार व्यक्तियों की रिहाई सुनिश्चित हो गई है।
जमीयत उलेमा ने इस अवसर पर उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस कानूनी संघर्ष में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग किया। संगठन की ओर से कहा गया कि कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, दानदाताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने प्रभावित परिवारों की सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मौलाना आसिम ने विशेष रूप से जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष एवं अमीर-ए-हिंद मौलाना सैयद अरशद मदनी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी रहनुमाई, कानूनी सहायता और निरंतर समर्थन ने पूरे अभियान को मजबूती प्रदान की। उन्होंने मुकदमों की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं की टीम के प्रयासों की भी सराहना की। अपने बयान में उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी प्रभावित परिवारों को न्याय, सम्मान और सामाजिक स्थिरता प्राप्त होगी तथा शहर में अमन, भाईचारा और कानून व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही उन्होंने समाज से शांति, सौहार्द और न्याय की भावना को आगे बढ़ाने की अपील भी की।







