देहरादून। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) के दूसरे चरण को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दावे-आपत्तियों के निस्तारण के दौरान मानसून के कारण मतदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में विशेष कैंप लगाकर सुनवाई की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने शुक्रवार को कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के मंडलायुक्तों तथा सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान के अगले चरण में ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन, नोटिस जारी करने और दावे-आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी तरह मतदाता हित में संचालित की जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मानसून के दौरान विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कें बाधित होने और आवागमन प्रभावित होने की संभावना रहती है। ऐसे में मतदाताओं को सुनवाई के लिए अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए पहले से व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) सुनवाई करेंगे, वहां बिजली, पेयजल, इंटरनेट, स्कैनर और फोटोकॉपी जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने पर्वतीय जनपदों में न्याय पंचायत स्तर पर क्लस्टर आधारित विशेष कैंप लगाने तथा मैदानी क्षेत्रों में तहसीलों के अलावा नगर निगम, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर भी सुनवाई शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। इसके लिए विस्तृत रोस्टर तैयार करने को कहा गया है, ताकि अधिक से अधिक मतदाता आसानी से अपनी आपत्तियां और दावे दर्ज करा सकें।

डॉ. पुरुषोत्तम ने दस्तावेजों के सत्यापन के लिए शिक्षा, राजस्व, तहसील और अन्य संबंधित विभागों से नोडल अधिकारियों की तैनाती करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 70 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और 800 सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) तैनात हैं। जिन जनपदों में अतिरिक्त एईआरओ की आवश्यकता है, वहां से प्रस्ताव तत्काल भेजने को कहा गया है। उन्होंने दोनों मंडलों के मंडलायुक्तों को 14 जुलाई से जिलों का स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और ईआरओ को समयबद्ध तरीके से राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर विधानसभा स्तर पर ड्राफ्ट मतदाता सूची उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए, ताकि पुनरीक्षण अभियान पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न हो सके।





