देहरादून। सरकारी नौकरी और आरटीओ से जब्त वाहनों की नीलामी का झांसा देकर लाखों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। दो पीड़ितों ने आशीष शर्मा और विपिन शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए परिवहन विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतों में फर्जी रसीद, कूटरचित सरकारी मोहर, जाली दस्तावेज, धमकी और लाखों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। मामले ने परिवहन विभाग में भी हलचल मचा दी है। राज राजेश्वरी कॉलोनी, देहरादून निवासी ऋषि ने शिकायत में आरोप लगाया है कि आशीष शर्मा ने खुद को आरटीओ विभाग से जुड़ा बताते हुए सस्ती दरों पर नीलाम होने वाले वाहन दिलाने का भरोसा दिया। इसके एवज में उसने 1.54 लाख रुपये नकद ले लिए और आरटीओ की कथित रसीद के साथ भरोसा दिलाने के लिए तीन चेक भी दिए। काफी समय बीतने के बाद न तो वाहन मिले और न ही रकम वापस की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उसने पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने आत्महत्या कर सुसाइड नोट में उसका नाम लिखने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी, साथ ही परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी।
दूसरे शिकायतकर्ता राकेश राठौर ने आरोप लगाया कि आशीष शर्मा ने अपने कथित रिश्तेदार विपिन शर्मा को आरटीओ का अधिकारी बताते हुए उनके बेटे को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया और इसके लिए एक लाख रुपये ले लिए। इसके बाद आरटीओ द्वारा जब्त वाहनों की नीलामी, डंपर और जेसीबी मशीन दिलाने के नाम पर अलग-अलग किश्तों में कुल 3.80 लाख रुपये और ऐंठ लिए। शिकायतकर्ता का कहना है कि एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी न नौकरी मिली, न वाहन और न ही रकम वापस की गई। राकेश राठौर ने अपनी शिकायत के साथ आरोपियों के साथ हुई व्हाट्सएप चैट भी साक्ष्य के रूप में उपलब्ध कराई है तथा दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।प्रकरण की गंभीरता तब और बढ़ गई जब जांच में यह तथ्य सामने आया कि कथित रूप से सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) और सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), देहरादून के नाम की कूटरचित सरकारी मोहरों का भी इस्तेमाल किया गया। परिवहन विभाग ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायतों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।







