हल्द्वानी। नैनीताल जिले में अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ और शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। इसी कड़ी में 12 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिससे जिले में हड़कंप मच गया है। इससे पहले विभिन्न क्षेत्रों के 38 स्कूलों पर कार्रवाई हो चुकी थी और अब कुल 50 निजी विद्यालय प्रशासन के निशाने पर आ चुके हैं। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल द्वारा की गई कार्रवाई में यह सामने आया कि कई स्कूलों ने एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के बजाय महंगी निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य कर दी हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ स्कूलों द्वारा अभिभावकों को विशेष दुकानों से ही किताबें और सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करने और अपनी वेबसाइट पर फीस व पुस्तक सूची का खुलासा न करने जैसी गंभीर अनियमितताएं भी पाई गई हैं।
प्रशासन ने इन कृत्यों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 का उल्लंघन मानते हुए स्कूलों को 15 दिन के भीतर व्यवस्था सुधारने के सख्त निर्देश दिए हैं। स्कूलों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता दें, अतिरिक्त महंगी किताबें हटाएं, फीस और बुक लिस्ट को सार्वजनिक करें तथा अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि का समायोजन या वापसी सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी के निर्देश पर इन मामलों की जांच के लिए विकासखंड स्तर पर संयुक्त समितियां गठित की गई हैं, जो निर्धारित समयसीमा में अपनी रिपोर्ट देंगी। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित स्कूलों की मान्यता निलंबित या निरस्त करने के साथ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। इस सख्त कदम से साफ संकेत मिल गया है कि जिले में शिक्षा के नाम पर मनमानी और अभिभावकों का शोषण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी एवं न्यायसंगत बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।





