नई दिल्ली/देहरादून। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित देश की पहली ‘लैंड बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट एसपी कॉन्फ्रेंस-2026’ में उत्तराखंड ने सीमा सुरक्षा और सामुदायिक भागीदारी का अपना मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया। सम्मेलन में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ समेत राज्य के पांचों अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया, जबकि चम्पावत पुलिस की ‘रात्रि चौपाल’ पहल और पिथौरागढ़ के ‘गुंजी मॉडल’ को विशेष सराहना मिली। नई दिल्ली में आयोजित देश की पहली ‘लैंड बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट एसपी कॉन्फ्रेंस-2026’ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा को और अधिक आधुनिक, तकनीक आधारित तथा जनसहभागिता से मजबूत बनाने पर जोर दिया। सम्मेलन में देश के 18 सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े जिलों के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।
उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने किया। उनके साथ नेपाल और तिब्बत (चीन) से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं वाले पांच जिलों—ऊधम सिंह नगर, पिथौरागढ़, चम्पावत, उत्तरकाशी और चमोली के पुलिस अधीक्षक भी सम्मेलन में शामिल हुए। गृह सचिव शैलेश बगोली, महानिदेशक अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑनलाइन भागीदारी की। सम्मेलन में उत्तराखंड पुलिस ने आधुनिक तकनीक आधारित सीमा निगरानी, सीमा पार अपराधों की रोकथाम, स्थानीय खुफिया तंत्र को मजबूत करने, सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास तथा विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से जुड़े सुझाव साझा किए। ‘कम्युनिटी एंगेजमेंट फॉर बॉर्डर डेवलपमेंट’ सत्र में चम्पावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने ‘फाइव पिलर्स ऑफ कम्युनिटी फोर्स मल्टीप्लिकेशन’ मॉडल प्रस्तुत किया, जिसमें विश्वास, सूचना, सहभागिता, क्षमता निर्माण तथा प्रोत्साहन एवं संरक्षण को सीमा सुरक्षा का आधार बताया गया। उन्होंने सीमांत क्षेत्रों में आयोजित ‘रात्रि चौपाल’ की सफलता और पिथौरागढ़ के ‘गुंजी मॉडल’ को रिवर्स माइग्रेशन के प्रभावी उदाहरण के रूप में भी प्रस्तुत किया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की अवधारणा के तहत सीमा सुरक्षा को नई तकनीक और बेहतर समन्वय के साथ मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि अगले तीन वर्षों में नशीले पदार्थों की तस्करी और घुसपैठ पर प्रभावी नियंत्रण के लिए व्यापक व्यवस्था विकसित की जाएगी। साथ ही ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ के माध्यम से सीमांत गांवों में पलायन रोकने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने कहा कि यह सम्मेलन सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, समन्वित और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में साझा किए गए अनुभव, नवाचार और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां उत्तराखंड सहित देश के सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा, विकास और नागरिक सहभागिता को नई मजबूती प्रदान करेंगी।





