- डेंगू नियंत्रण, अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी और क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के पालन को लेकर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश
हल्द्वानी। जनपद नैनीताल में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने पीसी-पीएनडीटी अधिनियम, डेंगू नियंत्रण और क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जनपद में किसी भी कीमत पर भ्रूण लिंग परीक्षण, अवैध अल्ट्रासाउंड संचालन और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और अवैध गतिविधियों की सूचना देने वालों को प्रोत्साहित भी किया जाएगा। कैम्प कार्यालय हल्द्वानी में आयोजित जिला सलाहकार समिति की बैठक में पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि पंत को जनपद के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी केंद्र पर भ्रूण लिंग परीक्षण नहीं होना चाहिए और यदि किसी संदिग्ध अल्ट्रासाउंड केंद्र की जानकारी मिलती है तो तत्काल छापेमारी की कार्रवाई की जाए।
जिलाधिकारी ने घोषणा की कि बिना पंजीकरण के अल्ट्रासाउंड मशीन संचालित करने वालों की सूचना देने पर 50 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा तथा सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना वैध पंजीकरण के अल्ट्रासाउंड मशीन का उपयोग कानूनन अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मानसून सीजन को देखते हुए जिलाधिकारी ने डेंगू की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर भी व्यापक समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, नगर निकायों और पंचायतीराज विभाग को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि डेंगू के खिलाफ जनजागरूकता अभियान को युद्धस्तर पर चलाया जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित सर्विलांस, समय पर जांच और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ नालियों की सफाई, जलभराव की समस्या का समाधान, फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर साफ-सफाई बनाए रखी जाए तथा लोगों को घरों और आसपास पानी जमा न होने देने के लिए जागरूक किया जाए। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि पूर्ण बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरदानी और मच्छररोधी उपायों का इस्तेमाल करें तथा बुखार आने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।

बैठक में क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने जनपद के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में इसके शत-प्रतिशत अनुपालन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि एक्ट के तहत प्रत्येक सरकारी और निजी अस्पताल में मरीजों का इलेक्ट्रॉनिक और मेडिकल हेल्थ रिकॉर्ड सुरक्षित रखना अनिवार्य है। यह प्रावधान नर्सिंग होम, क्लीनिक, डिस्पेंसरी, मेटरनिटी होम और एलोपैथी, होम्योपैथी तथा आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थानों पर समान रूप से लागू होता है। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी मरीज के आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचने पर उसे तत्काल आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान की कानूनी जिम्मेदारी है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि पंत सहित स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।





