- आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, बोले—पहले से डॉक्टरों की कमी, अब मरीजों का इलाज होगा प्रभावित
हल्द्वानी। हल्द्वानी के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में बड़े पैमाने पर हुए डॉक्टरों के तबादलों के बाद विरोध तेज हो गया है। कुमाऊं के सबसे बड़े महिला चिकित्सालय से आठ और बेस चिकित्सालय से नौ डॉक्टरों के स्थानांतरण के विरोध में आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन करते हुए सरकार से तबादला आदेश वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पहले से ही चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों से अनुभवी डॉक्टरों को हटाना आम मरीजों के हितों के खिलाफ है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिला अस्पताल और बेस अस्पताल पूरे कुमाऊं क्षेत्र के हजारों मरीजों के लिए प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र हैं। यहां पहले से ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में एक साथ 17 डॉक्टरों का स्थानांतरण होने से स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित होंगी और दूर-दराज़ के क्षेत्रों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इस निर्णय से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर होगी और इसका सीधा लाभ निजी अस्पतालों को मिलेगा। उनका कहना है कि यदि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होंगे तो आम जनता मजबूरी में महंगे निजी अस्पतालों का रुख करेगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने सरकार से तबादला आदेशों पर पुनर्विचार करने और जनहित को देखते हुए डॉक्टरों को वर्तमान अस्पतालों में ही बनाए रखने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
प्रदर्शन में इशरत अली, सायमा सिद्दीकी, रिंकी जोशी, हंसी बेलवाल सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।





