- ऑनलाइन रिकॉर्ड में फार्म-7 के जरिए आपत्ति दर्ज होने का दावा, जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
हल्द्वानी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच नाम काटने को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। बनभूलपुरा क्षेत्र के आजाद नगर निवासी समाजसेवी उवैस राजा ने शुक्रवार को क्षेत्र के लोगों के साथ सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर उनके नाम पर कथित तौर पर अज्ञात व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति की जांच कराने की मांग की।ज्ञापन में उवैस राजा ने कहा कि उन्होंने SIR प्रक्रिया के तहत अपना सत्यापन कराया था और दूसरे चरण में मैपिंग के लिए अपना फार्म BLO को जमा किया था। उनके अनुसार उन्हें किसी प्रकार का नोटिस प्राप्त नहीं हुआ, लेकिन 13 अगस्त को ऑनलाइन उपलब्ध रिकॉर्ड देखने पर उनके नाम के संबंध में फार्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज होने की जानकारी मिली। उन्होंने दावा किया कि यह आपत्ति भ्रमपाल नाम के व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई है, जिसे वह व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते हैं। उवैस राजा का आरोप है कि उनके नाम को मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया के संबंध में उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाने की मांग की कि उनके नाम पर आपत्ति किस आधार पर और किसके द्वारा दर्ज कराई गई।
समाजसेवी ने कहा कि उनके पास कथित आपत्ति से संबंधित दस्तावेज और ऑनलाइन रिकॉर्ड मौजूद हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि इस प्रकार अन्य मतदाताओं के नाम पर भी बिना उनकी जानकारी के आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में उवैस राजा ने कहा कि मतदाता सूची से किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम गलत तरीके से हटना लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने प्रशासन से SIR प्रक्रिया के दौरान दर्ज आपत्तियों की पारदर्शी तरीके से जांच कराने तथा जिन मतदाताओं ने स्वयं आपत्ति दर्ज नहीं कराई है, उनके मामलों में नियमानुसार सत्यापन सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में प्रशासनिक स्तर पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाने के लिए मजबूर होंगे। उवैस राजा ने कहा कि मतदाताओं के अधिकारों से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।











