हल्द्वानी। जिले में अवैध लिंग जांच (सेक्स डिटरमिनेशन) पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। अब जिले के सभी सरकारी और निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा। वहीं, किसी भी सेंटर पर अवैध लिंग जांच की सूचना देने वाले व्यक्ति को 50 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा और उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देशों के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि जनपद में सरकारी और निजी मिलाकर करीब 75 अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं। पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत प्रत्येक अल्ट्रासाउंड सेंटर का 90 दिनों के भीतर निरीक्षण किया जाना अनिवार्य है। इसी के तहत स्वास्थ्य विभाग ने निरीक्षण टीमों का गठन कर दिया है और इसी सप्ताह से अभियान शुरू किया जा रहा है। सीएमओ ने बताया कि सप्ताह में दो दिन निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा, जिसमें एक दिन में तीन से चार अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच होगी। निरीक्षण के दौरान केंद्रों के रजिस्टर, आवश्यक अभिलेख, मशीनों का रखरखाव, दस्तावेजों का सत्यापन और अधिनियम के तहत निर्धारित सभी मानकों की जांच की जाएगी।
उन्होंने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में लिंग जांच जैसी अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना और गिरते लिंगानुपात में सुधार लाना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग जनजागरूकता अभियान भी चला रहा है, ताकि लोग भ्रूण के लिंग की जांच न कराएं और इस सामाजिक बुराई को समाप्त करने में सहयोग दें। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग चिन्हित एमटीपी (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) केंद्रों की भी लगातार निगरानी कर रहा है। इन केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है ताकि गर्भसमापन से जुड़े सभी कार्य केवल एमटीपी अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप और अधिकृत चिकित्सा इकाइयों में ही किए जाएं। डॉ. रश्मि पंत ने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देश पर अवैध लिंग जांच के खिलाफ सूचना देने वालों के लिए 50 हजार रुपये के इनाम की व्यवस्था की गई है। यदि कोई व्यक्ति किसी अल्ट्रासाउंड सेंटर या चिकित्सा संस्थान में अवैध सेक्स डिटरमिनेशन की सूचना देता है, तो उसे पुरस्कार राशि दी जाएगी और उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग करने और ऐसी किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना प्रशासन को देने की अपील की है।







