- मुख्य न्यायाधीश की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध रहा मामला, हजारों प्रभावित परिवारों की निगाहें अब अगली सुनवाई पर
नई दिल्ली/हल्द्वानी। हल्द्वानी के बहुचर्चित रेलवे भूमि प्रकरण में एक बार फिर सुनवाई टल गई है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध यह मामला बुधवार को भी सुनवाई के लिए नहीं लिया गया। अब सभी की निगाहें 23 जुलाई 2026 को प्रस्तावित सुनवाई पर टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार अब्दुल मतीन सिद्दीकी बनाम भारत संघ मामला वर्तमान में लंबित है। 22 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होने के बावजूद इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। अब यह मामला 23 जुलाई 2026 को मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।

मामले के मुख्य याचिकाकर्ता एवं समाजवादी पार्टी के उत्तराखंड प्रभारी हाजी अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने बताया कि वह अपने अधिवक्ताओं के साथ सर्वोच्च न्यायालय में उपस्थित रहे, लेकिन व्यस्त न्यायिक कार्यवाही के कारण मामला नहीं सुना जा सका। उन्होंने कहा कि अगली निर्धारित तिथि पर भी वह पूरी तैयारी के साथ न्यायालय में उपस्थित रहेंगे और प्रभावित परिवारों का पक्ष मजबूती से रखेंगे। गौरतलब है कि हल्द्वानी रेलवे भूमि विवाद उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील मामलों में शामिल है, जिससे हजारों परिवारों का भविष्य जुड़ा हुआ है। इससे पहले 28 अप्रैल 2026 को भी मामला सूचीबद्ध होने के बावजूद सुनवाई नहीं हो सकी थी। लगातार सुनवाई टलने के बीच अब प्रभावित लोगों को उम्मीद है कि 23 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय पर है।






