हल्द्वानी। निजी विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत दाखिल विद्यार्थियों के नामांकन और सरकारी रिकॉर्ड में अंतर मिलने के बाद नैनीताल जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने हल्द्वानी क्षेत्र के आरटीई से जुड़े निजी विद्यालयों में विद्यार्थियों के प्रवेश, अभिलेखों और पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से आरटीई के नाम पर रिकॉर्ड में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका वाले मामलों की जांच तेज हो गई है। जिलाधिकारी ने भौतिक जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि खंड शिक्षा अधिकारी हल्द्वानी और कोषाधिकारी हल्द्वानी को सदस्य नामित किया गया है। समिति वर्ष 2021-22 से हल्द्वानी क्षेत्र में आरटीई के तहत पंजीकृत विद्यालयों का निरीक्षण करेगी और मौके पर विद्यार्थियों के नामांकन से संबंधित अभिलेखों की जांच कर पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों से उनका मिलान करेगी।
जांच के दायरे में आर्यमान विक्रम बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ लर्निंग, व्हाइट हॉल स्कूल लामाचौड़, व्हाइट हॉल स्कूल एक्सटेंशन हल्द्वानी, केडीएम पब्लिक स्कूल हीरानगर, यूनिवर्सल कॉन्वेंट स्कूल, इंस्पिरेशन स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल हल्द्वानी और दी आनन्दा एकेडमी समेत आरटीई के अंतर्गत पंजीकृत संबंधित विद्यालय शामिल हैं। आदेश के अनुसार कई विद्यालयों में आरटीई के निर्धारित 25 प्रतिशत मानक के मुकाबले नामांकन प्रतिशत में कमी भी सामने आई है। डीएम ने समिति को निर्देश दिए हैं कि विद्यालयों का मौके पर निरीक्षण करने के साथ सभी संबंधित अभिलेखों की गहन जांच की जाए और आरटीई पोर्टल तथा विभागीय रिकॉर्ड के बीच मिली विसंगतियों की स्पष्ट रिपोर्ट तैयार की जाए। समिति को एक माह के भीतर अपनी जांच आख्या जिलाधिकारी को सौंपनी होगी। जिला प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य आरटीई के तहत पात्र बच्चों को उनके अधिकारों का वास्तविक लाभ दिलाना और सरकारी धनराशि के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। भौतिक सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पोर्टल पर दर्ज आंकड़े और विद्यालयों की धरातलीय स्थिति में अंतर किन कारणों से सामने आया।







