हल्द्वानी। हल्द्वानी में स्मार्ट मीटर को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के रेलवे बाजार क्षेत्र के एक उपभोक्ता ने स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल में कई गुना बढ़ोतरी होने का आरोप लगाते हुए विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित का दावा है कि जांच के लिए लगाए गए चेक मीटर और स्मार्ट मीटर की रीडिंग में भारी अंतर सामने आया है, जबकि विभागीय अधिकारियों द्वारा उन पर दबाव बनाने और एफआईआर की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। रेलवे बाजार निवासी उस्मान अंसारी ने बताया कि उनके घर पर 1 अप्रैल 2026 को स्मार्ट मीटर लगाया गया था। इससे पहले उनका मासिक बिजली बिल सामान्यतः 1200 से 1500 रुपये के बीच आता था, लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद पहला बिल 5,500 रुपये, दूसरा 8,400 रुपये और तीसरा 10,600 रुपये का आया, जिसे उन्होंने ऑनलाइन जमा भी किया। लगातार बढ़ते बिलों से परेशान होकर उन्होंने विभाग में शिकायत दर्ज कराई।
पीड़ित के अनुसार शिकायत के बाद विद्युत विभाग ने 2 जुलाई को उनके घर पर चेक मीटर लगाया। उनका कहना है कि चेक मीटर में करीब 600 यूनिट खपत दर्ज हुई, जबकि उसी अवधि में स्मार्ट मीटर में 2500 से 2600 यूनिट दर्ज दिखाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों मीटरों की रीडिंग में लगभग 3000 यूनिट का अंतर है, जो पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उस्मान अंसारी ने आरोप लगाया कि मंगलवार शाम विद्युत विभाग के एसडीओ, जूनियर इंजीनियर, लाइनमैन सहित अन्य कर्मचारी उनके घर पहुंचे और मीटर की एमआरआई जांच कराने का दबाव बनाने लगे। उनका कहना है कि उन्होंने अधिकारियों से उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई करने का अनुरोध किया, लेकिन इसके बाद उन्हें विभाग के एक अधिकारी का फोन आया, उन्होंने कथित तौर पर मीटर से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी। पीड़ित ने कहा कि मीटर की सील विभाग ने ही लगाई थी और जांच के दौरान भी विभागीय कर्मचारियों ने ही सील खोली और दोबारा लगाई। ऐसे में उनके ऊपर मीटर से छेड़छाड़ का आरोप लगाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की मांग की है।







