- केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में किया संशोधन
- एक से दो साल तक के विलंबित मामलों में एसडीएम स्तर पर होगी कार्रवाई
हल्द्वानी। नगर क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करते हुए विलंब से होने वाले जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए सक्षम प्राधिकारी की व्यवस्था में बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों में अब प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा। केंद्र सरकार की ओर से 6 अगस्त 2026 को जारी जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के अनुसार, यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है तो संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट अथवा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद पंजीकरण किया जाएगा। इसके लिए जन्म या मृत्यु की वास्तविकता का सत्यापन और निर्धारित शुल्क का भुगतान आवश्यक होगा।
वहीं, जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद सूचना देने पर संबंधित क्षेत्र के प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा भी जन्म या मृत्यु की सत्यता के सत्यापन और निर्धारित शुल्क के भुगतान के बाद आदेश जारी किया जाएगा। एसडीएम हल्द्वानी मोनिका ने बताया कि यह बदलाव मुख्य रूप से विलंबित जन्म-मृत्यु पंजीकरण के मामलों में जांच और आदेश देने वाली अथॉरिटी से संबंधित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रमाण पत्र जारी करने की मूल व्यवस्था में बदलाव नहीं हुआ है। नगर क्षेत्र में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र का पंजीकरण एवं प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया नगर निगम के स्तर से तथा ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित व्यवस्था के तहत ही जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि पहले दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में भी जांच के बाद एसडीएम स्तर से आदेश जारी किया जाता था, लेकिन अब दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में यह अधिकार न्यायिक मजिस्ट्रेट को दिया गया है। वहीं, दो वर्ष से कम अवधि के विलंबित मामलों में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार एसडीएम स्तर पर कार्रवाई जारी रहेगी। अब आवेदकों को यह ध्यान रखना होगा कि घटना के कितने समय बाद पंजीकरण के लिए आवेदन किया जा रहा है, क्योंकि उसी आधार पर सक्षम प्राधिकारी के स्तर पर जांच और आदेश की प्रक्रिया निर्धारित होगी।




