हल्द्वानी। बनभूलपुरा रेलवे प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही पुनर्वास प्रक्रिया के बीच मुख्य याचिकाकर्ता अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने पुनर्वास कैंप पहुंचकर फॉर्म जमा करने और आपत्तियां दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन अधिकारियों द्वारा फॉर्म लेने से इनकार किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। मीडिया से बातचीत में सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें दिए गए फॉर्म में कई गंभीर खामियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म में पुनर्वास के लिए स्थान के विकल्प स्पष्ट नहीं हैं और संपत्ति के वास्तविक मूल्यांकन से जुड़े महत्वपूर्ण कॉलम भी शामिल नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि नगर निगम और प्रशासन के पास क्षेत्र के मकानों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है, इसके बावजूद लोगों से स्वयं जानकारी भरवाकर उन्हें “गरीब और झुग्गी निवासी” के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आपत्ति दर्ज कराने के लिए उन्होंने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को फॉर्म देने का प्रयास किया, लेकिन अधिकारियों ने उसे लेने से मना कर दिया, और कहा कि आप इसकी प्रति विधिक कार्यालय में रिसीव कराए। अब वे अपनी आपत्ति की प्रति ईमेल के माध्यम से और कार्यालय में जमा कराने की तैयारी कर रहे हैं।
वहीं, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने बताया कि पुनर्वास प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और अब तक करीब साढ़े पांच हजार फॉर्म जमा हो चुके हैं, जबकि सोमवार को ही लगभग 1200 फॉर्म प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम दिन शेष लोगों से भी फॉर्म जमा कराने की अपील की गई है। त्रिपाठी ने यह भी स्पष्ट किया कि कैंपों में तकनीकी समस्याएं मामूली हैं और उन्हें मौके पर ही दूर किया जा रहा है, ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति को असुविधा न हो। प्रशासन का कहना है कि प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।





