हल्द्वानी। उत्तराखंड में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने कार्रवाई और सख्त कर दी है। कुमाऊं रेंज की आईजी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि अब एक लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर ठगी के प्रत्येक मामले में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाना, ठगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना और ठगी गई रकम की जल्द रिकवरी कराना है। आईजी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि साइबर अपराध प्रदेश में सबसे तेजी से बढ़ने वाले अपराधों में शामिल हो चुके हैं। जनवरी 2026 से अब तक कुमाऊं रेंज में 1,400 से अधिक साइबर शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। बदलते अपराध के स्वरूप को देखते हुए सरकार ने नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं, जिनके तहत बड़े साइबर फ्रॉड के मामलों में तत्काल मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि सभी जिलों की पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों की फंसी हुई धनराशि जल्द से जल्द वापस कराई जाए। पुलिस के लगातार प्रयासों का ही परिणाम है कि साइबर फ्रॉड में रिकवरी रेट 20 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है। आईजी ने कहा कि पुलिस का लक्ष्य केवल साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि पीड़ितों की मेहनत की कमाई सुरक्षित वापस दिलाना भी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज, लिंक या ऑनलाइन लेनदेन पर भरोसा न करें। यदि कोई साइबर ठगी होती है तो बिना समय गंवाए 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते धनराशि को सुरक्षित कराया जा सके।






