हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल में अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं रेंज निवेदिता कुकरेती ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। मासिक अपराध गोष्ठी में अपराध की स्थिति, लंबित विवेचनाओं, साइबर अपराध, नशे के खिलाफ कार्रवाई, महिला एवं बाल अपराध तथा नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। आईजी ने स्पष्ट किया कि गंभीर मामलों में लापरवाही और अनावश्यक देरी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी। हल्द्वानी में आयोजित गोष्ठी में कुमाऊं परिक्षेत्र के सभी जनपद प्रभारियों ने भाग लिया। बैठक में 46 बिंदुओं पर जनपदवार कार्रवाई की समीक्षा करते हुए आईजी ने पुलिसिंग को अधिक जवाबदेह, तकनीक आधारित और परिणाममुखी बनाने के निर्देश दिए। नवीन आपराधिक कानूनों के तहत 60 और 90 दिन की समयसीमा में आरोप पत्र अथवा अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने, ई-साक्ष्य के अधिकतम इस्तेमाल, जीरो एफआईआर और ई-समन जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। आईजी ने साइबर अपराध पर भी सख्ती बरतने के निर्देश दिए। NCRP समेत विभिन्न तकनीकी पोर्टलों पर लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने और साइबर अपराध के हॉटस्पॉट चिन्हित कर निरोधात्मक कार्रवाई करने को कहा गया। साथ ही CCTNS, ई-बीट, सिक्योर मालखाना पोर्टल और अन्य ऑनलाइन व्यवस्थाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
गोष्ठी में 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक कुमाऊं में नशे के खिलाफ की गई कार्रवाई को भी प्रमुखता से समीक्षा में शामिल किया गया। NDPS एक्ट के तहत 382 मुकदमे दर्ज कर 519 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें वाणिज्यिक मात्रा से जुड़े 32 मामलों में 55 गिरफ्तारियां शामिल हैं। बरामद मादक पदार्थों की अनुमानित कीमत करीब 25.66 करोड़ रुपये बताई गई है। इस दौरान पुलिस ने 45 किलो चरस, 7.338 किलो स्मैक/ब्राउन शुगर/हेरोइन, 1050.7 किलो गांजा, 4.6 किलो अफीम, 36.8 किलो डोडा समेत बड़ी मात्रा में नशीली गोलियां, कैप्सूल और इंजेक्शन बरामद किए। आईजी ने नशे के नेटवर्क की सप्लाई चेन तक पहुंचने और तस्करों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट व वित्तीय कार्रवाई को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। समीक्षा में सामने आया कि इस अवधि में कुमाऊं में लूट के 94 प्रतिशत, डकैती के 100 प्रतिशत, हत्या के 96 प्रतिशत, बलात्कार के 100 प्रतिशत, वाहन लूट के 100 प्रतिशत और महिला अपहरण के 96 प्रतिशत मामलों का खुलासा किया गया। चोरी के 76 प्रतिशत और चैन स्नैचिंग के 79 प्रतिशत मामलों का भी अनावरण हुआ। आईजी ने शेष गंभीर मामलों के खुलासे के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।

गुमशुदा लोगों की तलाश में भी पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई की। सात माह में कुल 1,051 गुमशुदा लोगों को बरामद किया गया, जिनमें 12 वर्ष से कम आयु के 10 बच्चे, 12 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 210 बच्चे, 299 पुरुष और 532 महिलाएं शामिल हैं। नाबालिगों से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई और तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल के निर्देश दिए गए। जनसामान्य की शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा में बताया गया कि परिक्षेत्रीय शिकायत प्रकोष्ठ को वर्ष की शुरुआत से 31 जुलाई तक 1,048 शिकायतें मिलीं, जिनमें से 905 का निस्तारण किया जा चुका है। आईजी ने लंबित शिकायतों की नियमित समीक्षा और शिकायतकर्ताओं को गुणवत्तापूर्ण समाधान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। महिला, बच्चों और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में भी आईजी ने संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया। दो माह से अधिक समय से लंबित बलात्कार, पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट के मामलों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे प्रकरणों की विवेचना में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आईजी निवेदिता कुकरेती ने सभी जनपद प्रभारियों को निर्देशित किया कि अपराध नियंत्रण के साथ लंबित विवेचनाओं, शिकायतों और गंभीर अपराधों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनता को त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण पुलिस सेवा देना पुलिस की सर्वोच्च जिम्मेदारी है, इसलिए अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का धरातल पर प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।












