हल्द्वानी। बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष और लगातार सामने आ रही वनाग्नि की घटनाओं को लेकर वन विभाग और मीडिया के बीच एक महत्वपूर्ण गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें जमीनी चुनौतियों, समाधान और जनजागरूकता की भूमिका पर गंभीर चर्चा हुई। कार्यक्रम ने साफ संकेत दिया कि इन दोनों गंभीर मुद्दों से निपटने के लिए प्रशासन और समाज के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। गोष्ठी में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लेते हुए जंगलों के आसपास बसे ग्रामीण इलाकों में बढ़ते खतरे और वनाग्नि की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। इस दौरान हल्द्वानी के डीएफओ कुंदन कुमार ने स्पष्ट कहा कि जंगलों में आग की अधिकांश घटनाएं मानवीय लापरवाही का परिणाम हैं, जिन्हें जागरूकता और जिम्मेदारी से काफी हद तक रोका जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वन्यजीवों के जंगलों से बाहर आने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे ग्रामीणों की सुरक्षा पर सीधा खतरा पैदा हो रहा है। डीएफओ ने कहा कि विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में अलर्ट सिस्टम को मजबूत किया है और रेस्क्यू टीमों को सक्रिय रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। उन्होंने यह भी जोर दिया कि स्थानीय लोगों की भागीदारी के बिना इन समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। गोष्ठी में मीडिया की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया कि जनजागरूकता बढ़ाने में मीडिया एक सशक्त माध्यम है, जो इन मुद्दों को आम जनता तक पहुंचाकर सकारात्मक बदलाव ला सकता है। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि मानव और वन्यजीव के बीच संतुलन बनाए रखना और जंगलों को आग से सुरक्षित रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।







