हल्द्वानी। उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की संयुक्त निरीक्षण टीम ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में कथित रूप से बिना वैध पंजीकरण संचालित एक बाल संस्थान का खुलासा किया है। निरीक्षण के दौरान संस्थान में 11 बच्चे मिले, लेकिन संचालक संस्था से जुड़े कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। मामले को गंभीर मानते हुए आयोग ने दो दिन के भीतर जांच रिपोर्ट तलब की है, जबकि एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल को संस्था की गतिविधियों और फंडिंग की जांच कर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य योगेश रजवार के नेतृत्व में चाइल्ड हेल्पलाइन, बाल कल्याण समिति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल और पुलिस की संयुक्त टीम ने नैनीताल जिले में औचक निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के निकट गफूर बस्ती में संचालित एक गैर-सरकारी संस्थान में पांच बालिकाएं और छह बालक मौजूद मिले। मौके पर मौजूद कार्मिक ने बताया कि संस्थान का संचालन फादर पाईस द्वारा किया जा रहा है और इसे मिशनरी से आर्थिक सहायता प्राप्त होती है।
जांच में सामने आया कि संस्थान किशोर न्याय (जुवेनाइल जस्टिस) अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं है और संचालकों के पास संचालन संबंधी कोई वैध दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं थे। निरीक्षण टीम ने बच्चों के रहने और पढ़ाई की व्यवस्था को भी असुरक्षित पाया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि यहां आने वाले कई बच्चे पहले से विभिन्न विद्यालयों में पंजीकृत हैं।आयोग के सदस्य योगेश रजवार ने मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि बिना पंजीकरण बच्चों से संबंधित संस्थान चलाना कानून का उल्लंघन है और बच्चों की सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि मिशनरी फंडिंग, बच्चों को अलग व्यवस्था में शिक्षा दिए जाने और संस्थान के संचालन के अन्य पहलुओं की भी गहन जांच आवश्यक है, क्योंकि प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध प्रतीत होता है। आयोग ने बाल कल्याण समिति और चाइल्ड हेल्पलाइन को दो दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल को संस्था और उसके संचालकों की जांच कर नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।







