नैनीताल। पशुपालकों के लिए राहत भरा कदम उठाते हुए जिला प्रशासन ने भूसे की बढ़ती कीमतों और संभावित कालाबाजारी पर सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने आदेश जारी कर जनपद में भूसे के अनावश्यक भंडारण, काला बाजारी और राज्य से बाहर परिवहन पर तत्काल प्रभाव से 15 दिनों के लिए रोक लगा दी है। साथ ही ईंट-भट्टों और अन्य उद्योगों में भूसे के उपयोग एवं बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि उत्तराखंड में पशुओं के सूखे चारे के रूप में गेहूं का भूसा सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। हाल के दिनों में भूसे की कीमतों में तेजी से वृद्धि और बड़े पैमाने पर भंडारण की आशंकाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो पशुपालकों को चारे का संकट झेलना पड़ सकता है, जिससे बड़ी संख्या में पशुओं के परित्यक्त होने, कृषि फसलों को नुकसान पहुंचने, सड़क दुर्घटनाओं और कानून व्यवस्था की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। जारी आदेश के तहत जिले के सभी उपजिलाधिकारियों, नगर निकायों, पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि भूसे की जमाखोरी रोकने, काला बाजारी पर अंकुश लगाने और जनपद में उत्पादित भूसे को राज्य से बाहर भेजने पर प्रभावी निगरानी रखी जाए। इसके अलावा पुआल जलाने पर भी तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन के इस फैसले को पशुपालकों और गोसदनों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, जिससे आगामी दिनों में चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।







