- विधायक बोले—न्याय की मांग सामूहिक
- सीबीआई जांच पर स्थिति स्पष्ट करे सरकार
- UPI के नए MDR को लेकर उपभोक्ता और व्यापारी के बीच टकराव की आशंका
हल्द्वानी। हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने शुक्रवार को विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय की मांग को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठाई। साथ ही उन्होंने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर भी सवाल खड़े किए। विधायक ने आशंका जताई कि यदि इस शुल्क का बोझ किसी रूप में उपभोक्ताओं तक पहुंचा तो डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर व्यापारी और ग्राहक आमने-सामने आ सकते हैं। अंकिता भंडारी मामले को लेकर सुमित हृदयेश ने कहा कि पूरे प्रदेश की सामूहिक मांग है कि अंकिता भंडारी को न्याय मिले। उन्होंने कहा कि उनकी विशेष मांग यह है कि सरकार इस मामले में स्पष्ट करे कि क्या सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण की तरह सीबीआई जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि वह सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के प्रति अपनी संवेदना रखते हैं, लेकिन अंकिता भंडारी प्रकरण में भी जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। विधायक ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक जनभावना से जुड़ी हुई है। उन्होंने सरकार से इस मामले में पारदर्शी जांच और आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग रखी।
प्रेस वार्ता में UPI के नए शुल्क ढांचे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। सुमित हृदयेश ने कहा कि 0.4 प्रतिशत MDR को लेकर सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि इसका सीधा असर उपभोक्ता पर नहीं पड़ेगा, लेकिन व्यापारियों की ओर से लागत उपभोक्ताओं पर डालने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उपभोक्ता और व्यापारी के बीच अनावश्यक टकराव पैदा हो सकता है। गौरतलब है कि केंद्र के नए ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क व्यापारी पक्ष पर होगा और इसे उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति नहीं होगी। सरकार ने यह भी कहा है कि उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान निःशुल्क रहेगा। सुमित हृदयेश ने मांग की कि UPI की मौजूदा व्यवस्था में किसी भी ऐसे बदलाव से बचा जाए जिससे ग्राहक डिजिटल भुगतान के बजाय नकद लेनदेन की ओर लौटने को मजबूर हों। उन्होंने कहा कि यदि व्यापारी UPI भुगतान लेने से इनकार करने लगते हैं तो उपभोक्ता को ATM और बैंक से नकदी निकालने जैसी वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर होना पड़ सकता है। विधायक ने नए शुल्क ढांचे को वापस लेने की मांग करते हुए इसे रोलबैक करने की मांग उठाई।




