- न्यूनतम ₹1 लाख मासिक स्टाइपेंड की मांग पर अड़े रेजिडेंट डॉक्टर
- अस्पताल प्रशासन की बातचीत के बाद ओपीडी पर्चा सेवा फिर शुरू
हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज के सुशीला तिवारी अस्पताल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल शनिवार को भी जारी रही। हड़ताल के दौरान पीजी डॉक्टरों ने अस्पताल की ओपीडी पर्चा व्यवस्था और ओपीडी सेवाएं बंद कर दीं, जिससे इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थिति की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों से वार्ता की, जिसके बाद ओपीडी पर्चा बनाने की व्यवस्था दोबारा शुरू कराई गई, हालांकि पीजी रेजिडेंट डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर डटे हुए हैं। पीजी रेजिडेंट डॉक्टर लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों, कार्यभार और प्रशिक्षण के दौरान होने वाले खर्च के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। रेजिडेंट डॉक्टरों की प्रमुख मांग न्यूनतम एक लाख रुपये मासिक स्टाइपेंड किए जाने की है। इसी मांग को लेकर डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू की है।
हड़ताल के कारण शनिवार को एसटीएच की ओपीडी व्यवस्था प्रभावित होने से अस्पताल पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ओपीडी पर्चा नहीं बनने और चिकित्सकीय सेवाओं पर असर पड़ने से कई मरीजों को इंतजार करना पड़ा। बाद में अस्पताल प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए डॉक्टरों से बातचीत की और ओपीडी पर्चा व्यवस्था को दोबारा संचालित कराया। वहीं, पीजी डॉक्टरों के आंदोलन के बीच एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर सरकार ने फैसला लिया है। बीते पांच दिनों से एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। उनकी मांग मासिक स्टाइपेंड को ₹17 हजार से बढ़ाकर ₹30 हजार किए जाने की थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रेसवार्ता में बताया कि एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर सरकार ने निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब नजर पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों की मांग पर है। पीजी डॉक्टर न्यूनतम एक लाख रुपये मासिक स्टाइपेंड की मांग पर कायम हैं। ऐसे में एसटीएच में पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल जारी रहने से अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बना हुआ है।




