- यशपाल आर्य बोले—जाति के आधार पर सम्मान और अपमान का फैसला नहीं हो सकता
- सुमित हृदयेश ने कहा-हल्द्वानी में नफरत की राजनीति की कोई जगह नहीं
हल्द्वानी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद रामलीला मैदान में किए गए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर कांग्रेस का विरोध शुक्रवार को सड़कों पर उतर आया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर पार्क से गांधी प्रतिमा तक सत्याग्रह मार्च निकालकर सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस दौरान कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दिया कि संविधान के राज में जाति और सामाजिक पहचान के आधार पर भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। सत्याग्रह मार्च से पहले मंगल पड़ाव स्थित अंबेडकर पार्क में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद कांग्रेसजन पैदल मार्च करते हुए नैनीताल डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक परिसर स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा तक पहुंचे। मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने सामाजिक समानता, सम्मान, सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के समर्थन में नारे लगाए। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि सार्वजनिक स्थान किसी व्यक्ति की जाति या सामाजिक पहचान से अपवित्र नहीं होता। संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी व्यक्ति की सामाजिक पहचान को आधार बनाकर उसके सम्मान को ठेस पहुंचाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आर्य ने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई किसी धर्म या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस मानसिकता के खिलाफ है जो इंसान की गरिमा को उसकी जाति से जोड़ती है। बाबा साहेब अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समानता और सामाजिक न्याय का रास्ता दिखाया था और उसकी रक्षा करना प्रत्येक लोकतांत्रिक नागरिक की जिम्मेदारी है। हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि हल्द्वानी हमेशा आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता की पहचान रहा है। ऐसे में खरगे की जनसभा के बाद रामलीला मैदान के कथित शुद्धिकरण की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की जाति या सामाजिक पहचान के कारण किसी सार्वजनिक स्थल को शुद्ध करने की आवश्यकता महसूस की जाती है तो यह समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। हल्द्वानी की जनता ऐसी विभाजनकारी मानसिकता को स्वीकार नहीं करेगी। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह बिष्ट और जिला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल छिमवाल ने कहा कि यह मुद्दा केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद का नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और संविधान की भावना से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से घटना से दूरी बनाए जाने की बात कही जा रही है, ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी व्यक्ति या संगठन द्वारा सामाजिक भेदभाव अथवा किसी नागरिक की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य किया गया है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राजनीति में विचारों का विरोध हो सकता है, लेकिन जाति के आधार पर सम्मान और अपमान का फैसला नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और बाबा साहेब अंबेडकर ने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया। आज जरूरत है कि समानता, स्वतंत्रता और न्याय के इन मूल्यों को केवल भाषणों तक सीमित न रखकर सामाजिक जीवन में उतारा जाए। सत्याग्रह के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “संविधान के राज में भेदभाव नहीं चलेगा”, “सामाजिक सम्मान हमारा अधिकार है” और “जाति के आधार पर भेदभाव बंद करो” जैसे नारे लगाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह मार्च किसी धर्म या धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि भेदभाव और सामाजिक अपमान के खिलाफ लोकतांत्रिक प्रतिरोध है। मार्च में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, विधायक सुमित हृदयेश, राष्ट्रीय सचिव संजीव आर्य, पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल, पूर्व मंत्री हरीश दुर्गापाल, जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल, महानगर अध्यक्ष गोविंद सिंह बिष्ट समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे।











