नैनीताल। भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन और कृषि भूमि के दुरुपयोग के खिलाफ नैनीताल जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण भूखंडों को राज्य सरकार के पक्ष में निहित कर दिया है। जिला मजिस्ट्रेट ललित मोहन रयाल की न्यायालय ने विभिन्न मामलों में सुनवाई के बाद यह निर्णय लेते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि कृषि, बागवानी और आवासीय प्रयोजनों के लिए आवंटित भूमि का व्यावसायिक उपयोग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुसार कैंचीधाम क्षेत्र के ग्राम छड़ा, पट्टी मझेड़ा निवासी आनंद सिंह और राजेंद्र सिंह को कृषि कार्य के लिए पट्टे पर दी गई भूमि पर आवासीय मकान और दुकान का निर्माण पाया गया। पट्टे की शर्तों का उल्लंघन साबित होने पर 0.033 हेक्टेयर भूमि का पट्टा निरस्त करते हुए उसे राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश दिए गए। हल्द्वानी क्षेत्र से जुड़े एक अन्य मामले में बच्ची राम, मोहन चंद्र, लीला देवी और भगवती देवी द्वारा सामान्य जाति की महिला के पक्ष में 750 वर्ग फीट भूमि का अंतरण किए जाने की जांच हुई। सुनवाई के बाद जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने संबंधित भूमि को अंतरण की तिथि से ही राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने का आदेश पारित किया।
रामनगर तहसील के ढेला बंदोबस्ती क्षेत्र में बाग सिंह को कृषि प्रयोजन के लिए 0.100 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई थी, लेकिन निरीक्षण में उक्त भूमि पर रिसॉर्ट संचालित होता मिला। प्रशासन द्वारा पहले रिसॉर्ट को सील किया गया और बाद में पट्टे की शर्तों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए पूरी भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने का आदेश दिया गया। इसी तरह कुमायूं पेपर पैक्स प्राइवेट लिमिटेड तथा उससे संबद्ध व्यक्तियों द्वारा आवासीय उपयोग के लिए खरीदी गई भूमि पर रिसॉर्ट संचालित किए जाने का मामला भी सामने आया। जांच में भूमि उपयोग परिवर्तन की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर 3572 वर्ग मीटर भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के निर्देश जारी किए गए। कैंचीधाम क्षेत्र के ग्राम सुल्तान से जुड़े एक अन्य मामले में श्रीमती भानवी सिंह द्वारा बागवानी प्रयोजन के लिए खरीदी गई भूमि का निरीक्षण कराया गया। जांच में भूमि पर मौजूद 27 नाशपाती के पेड़ों और उनके लिए आवश्यक पहुंच मार्ग को संरक्षित रखते हुए 0.0344 हेक्टेयर भूमि उनके पक्ष में बनाए रखने का निर्णय लिया गया, जबकि शेष 0.5206 हेक्टेयर भूमि को राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दिए गए। जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय की इन कार्रवाइयों को भूमि सुधार कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और कृषि एवं बागवानी भूमि के व्यावसायिक दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।






