नैनीताल। अवमानना याचिका संख्या 402/2024 की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकार के रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए नियमितीकरण के आदेशों के पालन में लापरवाही पर गंभीर टिप्पणी की है। सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि पूर्व में पारित आदेशों के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा निर्धारित बिंदुओं का पालन नहीं किया गया, जिस पर न्यायालय ने नाराजगी जताई और मामले को गंभीरता से लेते हुए सचिव कार्मिक को तलब करने के निर्देश जारी किए। संगठन की ओर से अधिवक्ता एम.सी. पंत ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि कुंदन सिंह जजमेंट में दिए गए तीनों प्रमुख बिंदुओं में से एक का भी अनुपालन नहीं किया गया है। उन्होंने कार्मिक विभाग द्वारा जारी अनुबंध पत्र को पढ़ने का आग्रह किया, जिस पर न्यायालय ने पैरा-1 का संज्ञान लेते हुए स्पष्ट टिप्पणी की कि जहां आदेश नियमितीकरण का है, वहां अनुबंध आधारित नियुक्ति करना आदेश की भावना के विपरीत है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि अनुबंध पत्र में नियुक्ति को पूर्णतः अस्थायी बताना सीधे तौर पर न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकार की ओर से उपस्थित अपर महाधिवक्ता से सवाल किया कि नियमितीकरण किन परिस्थितियों में किया जाता है और अनुबंध व्यवस्था को गलत ठहराते हुए स्पष्ट जवाब मांगा। वहीं संगठन के वरिष्ठ अधिवक्ता जीतेन्द्र मोहन शर्मा ने जोर देते हुए कहा कि सरकार की अपील पहले ही खारिज हो चुकी है, जिससे सर्वोच्च न्यायालय का आदेश प्रभावी हो चुका है, इसके बावजूद तय समयसीमा तक आदेश का पालन न होना गंभीर अवमानना है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने अगली सुनवाई में स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं कि अब तक कितने कर्मचारियों का नियमितीकरण किया गया है। साथ ही सचिव कार्मिक को 20 अप्रैल को प्रातः 10:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायालय इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।







