देहरादून। उत्तराखण्ड में नकली दवाओं के संगठित कारोबार पर लगातार शिकंजा कसते हुए उत्तराखण्ड एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के तीन और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के साथ ही इस प्रकरण में अब तक कुल 16 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जीवन रक्षक ब्रांडेड दवाओं की नकली पैकिंग कर बाजार में बेचने वाले इस संगठित नेटवर्क के खिलाफ एसटीएफ की कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देश पर नकली दवा गिरोह के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह ने टीमों को गिरोह की पूरी कुंडली तैयार कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में ब्रांडेड कंपनियों की दवाओं की हूबहू नकल कर नकली दवाएं तैयार करने और बाजार में बेचने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को दबिश देकर गिरफ्तार किया गया। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि इस मामले की शुरुआत एक जून 2025 को हुई कार्रवाई से हुई थी, जब प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के नकली रैपर, आउटर बॉक्स, लेबल और क्यूआर कोड भारी मात्रा में बरामद करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचना एसटीएफ को सौंपी गई, जिसके बाद लगातार जांच और मैनुअल पुलिसिंग के जरिए गिरोह के नेटवर्क को खंगाला गया। जांच के दौरान सामने आया कि गिरोह के सदस्य ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाएं तैयार कर बाजार में सप्लाई कर रहे थे। पूर्व में गिरफ्तार आरोपी के खुलासे के आधार पर एसटीएफ टीम ने रुड़की और देवबंद में दबिश देकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों से पहले की कार्रवाई में भारी मात्रा में पैरासिटामोल, जिंक पाउडर और हजारों नकली टैबलेट बरामद की जा चुकी हैं, जिनके सैंपल उत्तराखण्ड राजकीय लैब जांच में नकली पाए गए। एसटीएफ के अनुसार गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से नकली दवाओं का निर्माण और बिक्री कर रहा था, जिससे लोगों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा था। पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास और अन्य राज्यों में नेटवर्क की भी जानकारी जुटा रही है। उत्तराखण्ड एसटीएफ का कहना है कि नकली दवा कारोबार के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।









