हल्द्वानी। 8 अगस्त को हल्द्वानी में आयोजित कांग्रेस की रैली के दौरान कथित आपत्तिजनक एवं उत्तेजक नारों और नैनीताल एसएसपी कार्यालय में कथित जबरन प्रवेश व अभद्र व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। उत्तराखंड राज्य स्तरीय जलागम परिषद के उपाध्यक्ष शंकर कोरंगा के नेतृत्व में लोगों ने पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड के नाम पुलिस अधीक्षक हल्द्वानी को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली से जुड़े कुछ वीडियो और वक्तव्यों के माध्यम से आरएसएस एवं भाजपा से जुड़े लोगों के संबंध में कथित आपत्तिजनक अथवा उकसाने वाले शब्दों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। हालांकि ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और बयानों की वास्तविकता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। यदि वीडियो और बयान वास्तविक पाए जाते हैं और उनमें कानून का उल्लंघन या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली गतिविधि सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में नैनीताल एसएसपी कार्यालय में कथित जबरन प्रवेश और पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार के मामले की भी जांच की मांग की गई है। इसके लिए कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने का आग्रह किया गया है। शंकर कोरंगा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द प्रभावित करने वाली गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ज्ञापन में पुलिस प्रशासन से रैली के वीडियो फुटेज, सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री और अन्य साक्ष्यों का निष्पक्ष सत्यापन कर दोष सिद्ध होने की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग की गई है। ज्ञापनकर्ताओं ने भविष्य में भी राजनीतिक आयोजनों और सार्वजनिक स्थलों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की। अब पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।







