देहरादून। सचिवालय में आयोजित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा बैठक में उस समय माहौल गंभीर हो गया, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों की तैयारी पर सवाल उठाते हुए तीखी नाराजगी जताई। उन्होंने दो टूक कहा कि इस तरह की महत्वपूर्ण बैठकों में बिना तथ्यात्मक तैयारी के आना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं के साथ भी खिलवाड़ है। मुख्यमंत्री ने विभागों के बीच समन्वय की कमी को विकास कार्यों में देरी की बड़ी वजह बताते हुए अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब हर विभाग को अपनी जिम्मेदारी तय करते हुए काम करना होगा और किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी सचिवों से तत्काल रिपोर्ट मांगी कि किस विभाग ने कितनी घोषणाएं पूरी की हैं और कितनी अब भी लंबित हैं।
सीएम धामी ने सभी लंबित घोषणाओं के शासनादेश 15 जून 2026 तक हर हाल में जारी करने के सख्त निर्देश दिए। साथ ही जिन योजनाओं के शासनादेश पहले ही जारी हो चुके हैं, उन पर तुरंत काम शुरू करने को कहा गया। उन्होंने चेतावनी दी कि अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी कड़ी नाराजगी जताई कि कई स्थानों पर कार्य शुरू होने के बावजूद शिलापट्ट नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि शिलापट्ट नहीं लगाए गए तो संबंधित जिलाधिकारी जिम्मेदार होंगे। साथ ही जिला स्तर के मामलों को शासन तक लटकाने पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान उसी स्तर पर किया जाए जहां वे उत्पन्न होती हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि 15 जून से पहले सभी लंबित कार्यों की दोबारा समीक्षा की जाएगी, जिसमें हर विभाग को अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद उन्होंने अल्मोड़ा जनपद के सल्ट, रानीखेत, सोमेश्वर और जागेश्वर विधानसभा क्षेत्रों की विकास योजनाओं की गहन समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जनता से किए गए वादे हर हाल में धरातल पर उतरने चाहिए और सरकार प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि आगे से किसी भी बैठक में पूरी तैयारी के साथ ही उपस्थित हों, अन्यथा सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें।





