देहरादून। उत्तराखंड में भूमि धोखाधड़ी के खिलाफ प्रशासन ने अब सख्त तेवर दिखाते हुए बड़े स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत गढ़वाल मंडल में लैंड फ्रॉड के मामलों पर शिकंजा कसते हुए 51 मामलों का निस्तारण किया गया है, जबकि 5 गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भूमाफियाओं के बड़े खेल का खुलासा हुआ, जिससे प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आया। सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में लंबित और नई शिकायतों की गहन समीक्षा की गई। इस दौरान कई चौंकाने वाले मामले सामने आए, जिनमें एक ही खसरे की जमीन को दो अलग-अलग लोगों को बेचने और फर्जी तरीके से कब्जा दिलाने जैसी गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि ऐसे मामलों में तत्काल सख्त कार्रवाई करते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए।
बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ बाहरी व्यक्तियों द्वारा नियमों का उल्लंघन कर जमीन खरीदने और उसका व्यावसायिक उपयोग करने के बाद उसे बेचने जैसे मामले भी हो रहे हैं। ऐसे एक मामले में रुद्रप्रयाग और ऋषिकेश से जुड़ी जमीन पर कार्रवाई करते हुए संबंधित भूमि को सरकार में निहित करने और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आयुक्त ने अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भूमि धोखाधड़ी के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर सभी लंबित मामलों की रिपोर्ट प्रस्तुत करने और 15 दिनों के भीतर दोबारा समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही तहसील स्तर पर रिपोर्ट की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और संयुक्त निरीक्षण शीघ्र पूरा करने को कहा गया। बैठक के दौरान कुछ अधिकारियों की अनुपस्थिति और अधूरी जानकारी प्रस्तुत करने पर आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए स्पष्टीकरण तलब किया। उन्होंने साफ कहा कि जनता को त्वरित न्याय दिलाने के लिए सभी मामलों का समयबद्ध निस्तारण अनिवार्य है।अब तक कुल 170 मामलों में से 77 की सुनवाई पूरी हो चुकी है, जिनमें 51 का निस्तारण किया गया है।






