हल्द्वानी। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी का दशम दीक्षांत समारोह सोमवार को अत्यंत गरिमामय और भव्य वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ते हुए कुल 18,146 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा स्तर की उपाधियाँ प्रदान की गईं, जबकि छह शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया। समारोह का शुभारंभ शोभायात्रा, राष्ट्रगान और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विस्तार, शोध गतिविधियों, नवाचारों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर किए गए प्रयासों की जानकारी दी। इसके उपरांत कुलाधिपति द्वारा विधिवत उपाधि वितरण की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए दो विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 28 विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक तथा चार विद्यार्थियों को प्रायोजित स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के छह शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
वहीं विश्वविद्यालय के आईसीटी अनुभाग द्वारा तैयार किए गए ‘हैलो हल्द्वानी’ रेडियो ऐप के लिए अभियंता विनीत पौरियाल को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की नवनिर्मित ‘शौर्य दीवार’, हिंदी वेबसाइट, ‘प्रगति के सोपान’ तथा त्रैमासिक पत्रिका ‘उड़ान’ का भी लोकार्पण किया गया। पीएचडी एवं स्वर्ण पदक प्राप्त विद्यार्थियों के साथ कुलाधिपति ने समूह फोटोग्राफ भी कराया। अध्यक्षीय उद्बोधन में महामहिम कुलाधिपति ने विद्यार्थियों को सत्य, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों को अपनाते हुए निरंतर सीखते रहने का संदेश दिया। उन्होंने उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा को घर-घर तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा कारागारों, सेना, आईआईटी रुड़की सहित विभिन्न संस्थानों के साथ किए गए शैक्षणिक समझौतों को शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। दीक्षांत समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव द्वारा आभार ज्ञापन प्रस्तुत किया गया और राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।






