गैरसैंण में दो दिवसीय सत्र पर यशपाल आर्य का हमला, बोले- लोकतांत्रिक परंपराओं की निभाई जा रही रस्म अदायगी

  • सत्र गैरसैंण में, लेकिन अहम बैठकें देहरादून में कराने पर उठाए सवाल
  • विधानसभा सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के गैरसैंण में प्रस्तावित दो दिवसीय अंतिम सत्र को लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विधानसभा सत्र को महज दो दिनों तक सीमित रखकर लोकतांत्रिक परंपराओं की औपचारिकता निभा रही है। सत्र गैरसैंण में आयोजित किए जाने के बावजूद कार्यमंत्रणा समिति और विधानमंडल दल के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठकें देहरादून में कराने के निर्णय पर भी उन्होंने सवाल उठाए। यशपाल आर्य ने कहा कि पंचम विधानसभा के पूरे कार्यकाल में संसदीय परंपराओं की लगातार अनदेखी की गई है। गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी और पर्वतीय क्षेत्रों की आकांक्षाओं का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि सत्र से संबंधित महत्वपूर्ण बैठकें भी गैरसैंण में ही आयोजित की जानी चाहिए थीं। उन्होंने सरकार और विधानसभा सचिवालय से सवाल किया कि जब सदन की कार्यवाही गैरसैंण में होनी है, तो सत्र की कार्यसूची और कार्यवाही तय करने वाली बैठकें देहरादून में क्यों कराई जा रही हैं।

गैरसैंण में दो दिवसीय सत्र पर यशपाल आर्य का हमला, बोले- लोकतांत्रिक परंपराओं की निभाई जा रही रस्म अदायगी

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी, पलायन, महंगाई, भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर विधानसभा में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। इसके बावजूद अंतिम सत्र को केवल दो दिनों तक सीमित रखना जनता की समस्याओं पर चर्चा और सरकार को जवाबदेह बनाने के अवसर कम करता है। उन्होंने विधानसभा के पूरे कार्यकाल में सदन की कम बैठकों पर भी चिंता जताई। आर्य ने कांग्रेस की परिवर्तन रैलियों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सत्र से तीन दिन पहले वरिष्ठ कांग्रेस विधायकों को देहरादून बुलाने का निर्णय रैलियों में उनकी भागीदारी को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सदन तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं उठाना भी उसकी जिम्मेदारी है। कांग्रेस जनता के मुद्दों को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाती रहेगी। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मांग की कि विधानसभा के अंतिम सत्र की अवधि बढ़ाई जाए और कार्यमंत्रणा समिति सहित विधानमंडल दल के नेताओं की सभी महत्वपूर्ण बैठकें गैरसैंण में आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार को संसदीय मर्यादाओं, लोकतांत्रिक परंपराओं और गैरसैंण की गरिमा का सम्मान करते हुए निर्णय लेना चाहिए, ताकि जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास मजबूत हो सके।

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