नैनीताल। उत्तराखंड में लगातार आ रही प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उच्च न्यायालय ने अपनी स्थापना के रजत जयंती समारोह को स्थगित करने का फैसला किया है और समारोह पर प्रस्तावित ₹1.50 करोड़ के बजट को वापस लेकर इसे मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का निर्णय लिया है। यह राशि आपदा प्रभावित परिवारों की राहत और पुनर्वास में खर्च की जाएगी। यही नहीं, उच्च न्यायालय के सभी न्यायमूर्ति एवं रजिस्ट्री में तैनात न्यायिक अधिकारी अपने एक दिन का मूल वेतन भी मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करेंगे।

न्यायालय ने राज्य के न्यायिक अधिकारियों और जिला न्यायालयों के अधीनस्थ कर्मचारियों से भी राहत प्रयासों में इसी प्रकार योगदान देने का आह्वान किया है।न्यायपालिका का यह कदम इस बात का प्रतीक है कि राज्य की न्याय व्यवस्था केवल विधिक मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की इस घड़ी में समाज के साथ खड़ी होकर सहयोग देने को भी प्रतिबद्ध है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह योगदान प्रभावित परिवारों की पीड़ा कम करने और उन्हें पुनः जीवन पटरी पर लाने में सहायक होगा। यह निर्णय न केवल न्यायपालिका की सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि प्रदेश के आमजन में यह संदेश भी देता है कि कठिन समय में सभी संस्थान एकजुट होकर सहयोग कर रहे हैं।






