धामी कैबिनेट के समानांतर हल्द्वानी में बैठी ‘सांकेतिक सरकार’, गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का प्रस्ताव पारित

  • बुद्ध पार्क में मेज-कुर्सियां सजाकर हुई सांकेतिक कैबिनेट बैठक
  • हरीश रावत बने मुख्यमंत्री, 10 दिन से जारी है धरना और अनशन

हल्द्वानी। गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग को लेकर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में अनूठे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया गया। गैरसैंण में जहां प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक और विधानसभा सत्र को लेकर राजनीतिक हलचल तेज रही, वहीं हल्द्वानी में आंदोलनकारियों ने सरकार के समानांतर एक ‘सांकेतिक कैबिनेट’ आयोजित कर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। बुद्ध पार्क में आयोजित इस सांकेतिक बैठक में पहाड़ी आर्मी के संस्थापक हरीश रावत को सांकेतिक मुख्यमंत्री बनाया गया, जबकि अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को मंत्रियों की जिम्मेदारी सौंपी गई। बैठक के लिए बाकायदा मेज-कुर्सियां लगाई गईं और सभी प्रतिभागियों ने पारंपरिक पहाड़ी टोपी पहनकर राजधानी के मुद्दे पर चर्चा की। प्रदर्शनकारियों ने इस आयोजन के जरिए सरकार से गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग उठाई।

धामी कैबिनेट के समानांतर हल्द्वानी में बैठी ‘सांकेतिक सरकार’, गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का प्रस्ताव पारित

गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर हल्द्वानी में पिछले 10 दिनों से धरना-प्रदर्शन और अनशन जारी है। आंदोलन की अगुवाई पूर्व आईएएस अधिकारी मनोज प्रसाद रतूड़ी और पहाड़ी आर्मी के सदस्य कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि स्थायी राजधानी का मुद्दा लंबे समय से लंबित है और सरकार को इस पर जल्द निर्णय लेना चाहिए। सांकेतिक मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर वर्षों से आंदोलन चल रहा है। उनके मुताबिक, प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा दोनों की सरकारें सत्ता में आईं, लेकिन स्थायी राजधानी का फैसला नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि सांकेतिक कैबिनेट बैठक आयोजित करने का उद्देश्य सरकार का ध्यान जनता की भावनाओं की ओर आकर्षित करना और गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग को फिर से मजबूती से उठाना है। बुद्ध पार्क में आयोजित इस सांकेतिक कैबिनेट बैठक के जरिए आंदोलनकारियों ने स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का मुद्दा अभी भी उनके आंदोलन के केंद्र में है।

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