- इंडिया गेट पर न्याय की मांग को लेकर जुटे अंकिता के माता-पिता और कांग्रेस नेता
- ललित जोशी बोले—विवादों से जुड़े आरोपों के बीच राज्यपाल नियुक्त करना उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा
हल्द्वानी। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर 14 अक्टूबर को दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन में अंकिता के माता-पिता के साथ कांग्रेस के कई नेता शामिल हुए। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौके पर पहुंचे। 15 अक्टूबर की तड़के पुलिस द्वारा अंकिता के माता-पिता और कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर के बाद उत्तराखंड में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ललित जोशी ने मामले को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े विवादों के बीच संबंधित व्यक्ति को राज्यपाल नियुक्त करना उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। ललित जोशी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर भाजपा के तत्कालीन उत्तराखंड प्रभारी पर आरोप लगाए गए थे और इस पूरे मामले में उनकी कथित भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे विवादों के बीच किसी व्यक्ति को राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर नियुक्त किया जाना उत्तराखंड के लोगों के लिए पीड़ादायक है। जोशी ने इस नियुक्ति को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। कांग्रेस नेता ने भाजपा के चाल, चरित्र और चेहरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर बेटियों के सम्मान की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग कर रहे लोगों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में लिए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने की मांग को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। जोशी ने कहा कि अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग केवल उसके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की जनता की भावनाओं से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से इस पूरे मामले पर आत्ममंथन करने की बात कही।
