- एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन ने पुलिस मुख्यालय में दी जांच और न्यायिक कार्रवाई की जानकारी
- तीनों दोषियों को मई 2025 में सुनाई गई थी आजीवन कठोर कारावास की सजा
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में जारी चर्चाओं के बीच अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर मामले की जांच और न्यायिक कार्रवाई से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सितंबर 2022 में ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में कार्यरत अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में पुलिस ने घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया, जिसने 88 दिनों में जांच पूरी कर करीब 500 पृष्ठों का आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था। डॉ. मुरुगेशन के अनुसार, घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर तत्काल एसआईटी का गठन किया गया था। डीआईजी स्तर की महिला आईपीएस अधिकारी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई, ताकि मामले की गहन और प्रभावी जांच सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि एसआईटी ने जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य एकत्र किए।

इसके साथ ही आरोपियों से पूछताछ, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्टों का विश्लेषण किया गया। जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। एडीजी ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रभावी पैरवी की। पुलिस के अनुसार, 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। पुलिस के मुताबिक, तीनों दोषी वर्तमान में जेल में बंद हैं और सजा काट रहे हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। घटना के बाद प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग लगातार उठती रही। हाल के दिनों में भी इस मामले को लेकर प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी सामने आई है। पुलिस मुख्यालय में हुई प्रेस वार्ता के दौरान एडीजी ने जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई का विवरण रखा। वहीं, मामले से जुड़े अन्य आरोपों और उठ रहे सवालों पर संबंधित तथ्यों तथा आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।
