- लोक भवन में ‘यूथ अगेंस्ट करप्शन’ गोष्ठी में राज्यपाल गुरमीत सिंह का सख्त संदेश, पारदर्शिता और जवाबदेही पर दिया जोर
देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने लोक भवन में सतर्कता अधिष्ठान उत्तराखण्ड द्वारा आयोजित “यूथ अगेंस्ट करप्शन” विषयक गोष्ठी में भ्रष्टाचार को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए इसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार विकास के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है और इसे जड़ से समाप्त करने के लिए समाज के हर वर्ग को सामूहिक रूप से आगे आना होगा। राज्यपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक देने और लेने वाले दोनों की सोच में बदलाव नहीं आएगा, तब तक व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव नहीं है। उन्होंने विजिलेंस विभाग और पुलिस प्रशासन की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ई-गवर्नेंस, तकनीक और डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाओं से पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका कम हुई है। साथ ही उन्होंने भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों को सजा की दर बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। गोष्ठी में पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षाविदों और युवाओं ने सक्रिय भागीदारी करते हुए भ्रष्टाचार के कारणों, सामाजिक प्रभाव और निवारण के उपायों पर विचार साझा किए।
परिचर्चा में युवाओं की भूमिका, जन-जागरूकता, पारदर्शी शासन और तकनीक के प्रभावी उपयोग को भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत हथियार बताया गया। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भ्रष्टाचार पर कठोर प्रहार अनिवार्य है। राज्यपाल ने उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार के विरुद्ध बीते वर्षों में हुई सख्त कार्रवाइयों की सराहना करते हुए युवाओं से अपील की कि वे ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और भ्रष्टाचार को न स्वीकार करने का संकल्प लें। गोष्ठी में पुलिस महानिदेशक (सेनि) जे.एस. पाण्डेय, न्यायाधीश (सेनि) कुमकुम रानी, मुख्य सूचना आयुक्त (सेनि) विपिन चंद्रा, सूचना आयुक्त योगेश कुमार देव सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, निदेशक सतर्कता वी. मुरुगेशन, डीआईजी सतर्कता प्रहलाद नारायण मीणा समेत अन्य अधिकारी और विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।














