हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल के भूमि उपयोग से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए आयुक्त/सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत ने सोमवार को काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस सभागार में बैठक की। बैठक में जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम के अंतर्गत भूमि के क्रय और उपयोग के मामलों की गहन समीक्षा की गई। आयुक्त रावत ने पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में भूमि क्रय के दौरान बताई गई उपयोगिता के अनुसार भूमि का प्रयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धार्मिक प्रयोजन के नाम पर खरीदी गई भूमि का यदि होटल, रिसॉर्ट या अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों में इस्तेमाल हो रहा है, तो ऐसे मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। समीक्षा के दौरान बताया गया कि नैनीताल में भूमि उपयोग उल्लंघन के 74, अल्मोड़ा में 24, ऊधम सिंह नगर में 41 और बागेश्वर में 4 मामले सामने आए हैं। हालांकि, चंपावत और पिथौरागढ़ में अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।
आयुक्त ने यह भी कहा कि कृषि प्रयोजन के लिए खरीदी गई भूमि का गैर-कृषि उपयोग जैसे होटल और रिसॉर्ट बनाने के लिए किया जाना कानून का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में भूमि को राज्य सरकार के अधीन किया जाना चाहिए। बैठक में उपजिलाधिकारी और तहसीलदारों ने सुझाव दिया कि बाहरी व्यक्तियों को 250 वर्ग मीटर तक की आवासीय भूमि क्रय के लिए प्रशासन की अनुमति अनिवार्य की जाए। इस नियम से भूमि खरीदने वालों की प्रोफाइलिंग सुनिश्चित होगी और अधिनियम के उल्लंघन की घटनाएं रोकी जा सकेंगी। इसके अलावा, उन्होंने जिलेवार नीति बनाने की भी वकालत की, ताकि भूमि की उपलब्धता और जरूरत को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रवार प्रतिबंध लगाए जा सकें। आयुक्त ने यह भी कहा कि बैठक में उठाए गए मुद्दों और कानून लागू करने में आ रही कठिनाइयों की जानकारी शासन को दी जाएगी।






