हल्द्वानी। उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा और परंपराओं की झलक पेश करते कुमाऊं द्वार महोत्सव के सांस्कृतिक संध्या समारोह में सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित इस पांच दिवसीय महोत्सव में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता, पहचान और जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कुमाऊं द्वार महोत्सव हमारी लोक संस्कृति, परंपराओं और खानपान की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है। यह न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का कार्य कर रहा है, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सार्थक प्रयास भी है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से कलाकारों को मंच मिलता है, उनकी प्रतिभा को पहचान और सम्मान प्राप्त होता है, और यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने राज्य की महिला सशक्तिकरण योजनाओं का उल्लेख करते हुए “लखपति दीदी योजना” को महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति ही राज्य की असली ताकत है, और उत्तराखंड का यह दशक मातृशक्ति के नेतृत्व में विकास का दशक बनेगा। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने स्वदेशी अपनाने की अपील करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्वदेशी अपनाओ, देश को मजबूत बनाओ” के मंत्र को आत्मसात कर हर व्यक्ति स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दे। उन्होंने कहा कि “लखपति दीदी योजना” जैसी पहलें न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही हैं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दे रही हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार लोक कलाकारों और साहित्यकारों के सम्मान व प्रोत्साहन के लिए अनेक योजनाओं पर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि 3200 से अधिक लोक कलाकारों को कोविड काल में ₹2000 मासिक सहायता दी गई, वहीं गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत लोक प्रशिक्षण कार्यशालाओं के जरिए युवा पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने नकल विरोधी कानून और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का भी उल्लेख करते हुए कहा कि बीते चार वर्षों में राज्य में 25,000 से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है, जबकि 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों को जेल भेजा गया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्वदेशी उत्पादों के स्टॉल का अवलोकन किया और स्थानीय महिलाओं के प्रयासों की सराहना की। महोत्सव में लोक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और गीतों से दर्शकों का मन मोह लिया।






