- विकास कार्यों के लिए 32 करोड़ की बड़ी स्वीकृति
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर सख्ती से अमल कर रही है। द लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी द्वारा निवेशकों के साथ की गई व्यापक धोखाधड़ी के मामलों में उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों में दर्ज एफआईआर को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को स्थानांतरित किए जाने की मंजूरी देते हुए मुख्यमंत्री ने कड़ा संदेश दिया है। साथ ही, पाखरों टाइगर सफारी निर्माण घोटाले से जुड़े दो पूर्व वरिष्ठ वन अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति भी दे दी गई है। मुख्यमंत्री ने सीबीआई की जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन उप वन संरक्षक अखिलेश तिवारी और किशन चंद के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में अभियोजन चलाए जाने को मंजूरी देकर यह जाहिर कर दिया कि सरकारी धन और योजनाओं में गड़बड़ी करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।
इस बीच, सरकार ने मानसून में क्षतिग्रस्त पुलों और वैली ब्रिजों के निर्माण के लिए भी 32.23 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। चमोली जिले में वर्ष 2026 में प्रस्तावित नंदा देवी राजजात यात्रा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक मार्गों के विकास के लिए करीब 4.89 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल और चमोली में सड़कों, मोटर मार्गों और सुरक्षात्मक कार्यों हेतु करोड़ों रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री ने चमोली के सारकोट-भराड़ीसैंण मोटर मार्ग का नामकरण शहीद हवलदार वासुदेव के नाम पर करने तथा पौड़ी के दुगड्डा स्थित राजकीय इंटर कॉलेज का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भवानी सिंह रावत के नाम पर रखने की स्वीकृति भी प्रदान की है। मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं से यह स्पष्ट है कि एक ओर सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दे रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के विकास को भी गति देने के लिए ठोस कदम उठा रही है।





