देहरादून। प्रेमनगर थाना क्षेत्र में 11 मार्च को मांडूवाला रोड स्थित बालासुंदरी मंदिर परिसर के पास एक अज्ञात महिला का शव बोरे में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई थी। शव कई दिन पुराना होने के कारण उसकी पहचान नहीं हो पा रही थी, जिसके चलते यह मामला पुलिस के लिए चुनौती बन गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आठ टीमों का गठन कर जांच शुरू की। करीब 2500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, लेकिन घटनास्थल जंगल क्षेत्र होने के कारण कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने 30 से अधिक झुग्गी-बस्तियों में अभियान चलाकर 5000 से ज्यादा लोगों का सत्यापन किया और मृतका की पहचान के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए। लगातार प्रयासों के बाद पुलिस को एक निर्माणाधीन साइट पर काम करने वाले मजदूर के बारे में जानकारी मिली, जिसकी पत्नी अचानक लापता थी। शक के आधार पर पुलिस ने आरोपी रंजीत शर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अपनी पहली पत्नी रूपा की हत्या की बात कबूल कर ली।

पूछताछ में सामने आया कि आरोपी की पहली पत्नी रूपा कुछ वर्ष पहले उसे छोड़कर दूसरे व्यक्ति के साथ चली गई थी, जिसके बाद उसने दूसरी शादी कर ली थी। करीब एक वर्ष पहले रूपा फिर उसके संपर्क में आई और हाल ही में अपनी 11 माह की बच्ची के साथ देहरादून आकर उसके साथ रहने लगी। इस दौरान वह आरोपी पर दूसरी पत्नी को छोड़ने का दबाव बना रही थी, जिससे दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। 5 मार्च की रात विवाद बढ़ने पर आरोपी ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को बोरे में बंद कर चार दिन तक कमरे में छिपाए रखा और मौका मिलने पर मोटरसाइकिल से ले जाकर जंगल में फेंक दिया। पुलिस के अनुसार आरोपी को विश्वास था कि मृतका की पहचान नहीं हो पाएगी और वह बच निकलेगा, लेकिन सघन जांच और सूक्ष्म सुरागों के आधार पर पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया। इस मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं उत्कृष्ट कार्य के लिए पुलिस टीम को अधिकारियों द्वारा नगद पुरस्कार देने की घोषणा भी की गई है।










