दिल्ली/हल्द्वानी। हल्द्वानी के चर्चित बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा है कि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन और उसके आसपास स्थित रेलवे व सरकारी भूमि पर वर्षों से बने अवैध कब्जों के मामले में प्रभावित परिवारों की पात्रता तय कर उन्हें पुनर्वास योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाए। साथ ही अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित की है। मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने 24 फरवरी को हुई सुनवाई के बाद आज जारी आदेश में कहा कि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के आसपास लगभग 30 हेक्टेयर से अधिक सार्वजनिक भूमि पर वर्षों से अतिक्रमण है, जहां करीब 4,365 मकान बने हुए हैं और 50 हजार से अधिक लोग निवास कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि रेलवे परियोजना के लिए भूमि की आवश्यकता को देखते हुए इस स्थिति को अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रहने दिया जा सकता।
अदालत में केंद्र सरकार और रेलवे की ओर से बताया गया कि हल्द्वानी परियोजना के तहत रेलवे लाइन के पुनर्संरेखन (री-अलाइनमेंट) के लिए लगभग 30.65 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रभावित परिवारों को अपने ढांचों को हटाने के लिए छह महीने की अवधि तक प्रतिमाह दो हजार रुपये की अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) देने का प्रस्ताव है, जो केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देंगे। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जांच में 13 परिवार ऐसे पाए गए हैं जो छोटे भूखंडों के वास्तविक मालिक हैं। यदि रेलवे परियोजना के लिए उनकी भूमि की आवश्यकता होगी तो उसे विधि अनुसार अधिग्रहित किया जाएगा। वहीं अन्य निवासियों को अवैध कब्जेदार बताया गया है और स्पष्ट किया गया कि वे उसी स्थान पर पुनर्वास का दावा नहीं कर सकते। हालांकि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्रता के आधार पर आवास के लिए आवेदन करने का अवसर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्षेत्र में रहने वाले अनेक परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हो सकते हैं, इसलिए उनकी पात्रता तय करने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।

इसके लिए अदालत ने उत्तराखंड राज्य सेवा विधि प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि 19 मार्च 2026 के बाद क्षेत्र में विशेष पुनर्वास कैंप लगाए जाएं, ताकि प्रत्येक परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन करने में सहायता मिल सके। अदालत ने निर्देश दिए कि इन कैंपों में यूएसएलएसए के सदस्य सचिव, न्यायिक अधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधि तथा प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहेंगे। साथ ही जिलाधिकारी नैनीताल, हल्द्वानी के उपजिलाधिकारी और अन्य राजस्व अधिकारी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेंगे। अदालत ने उम्मीद जताई है कि आवेदन प्रक्रिया 31 मार्च 2026 तक पूरी कर ली जाएगी और जरूरत पड़ने पर एक से अधिक कैंप लगाए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में दी गई अंतरिम राहत को सभी अवैध कब्जेदारों के लिए सामान्य सुरक्षा आदेश नहीं माना जाएगा। प्रत्येक मामले पर अलग-अलग आधार पर विचार किया जाएगा। अदालत ने उत्तराखंड सरकार और संबंधित एजेंसियों से पूरी प्रक्रिया की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित की है।






