- हल्द्वानी में प्रेसवार्ता कर महापौर ने निर्वाचन आयोग के संयुक्त बयान का हवाला दिया
- कहा—SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए
हल्द्वानी। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम के महापौर गजराज सिंह बिष्ट ने कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला बोला। नगर निगम कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान से SIR को लेकर उठाए जा रहे कई सवालों पर निर्वाचन आयोग का पक्ष स्पष्ट हुआ है। निर्वाचन आयोग ने अपने बयान में SIR समेत प्रमुख फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है। महापौर गजराज बिष्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग के अनुसार 24 जून 2025 को जारी SIR के मूल आदेश और बाद में विभिन्न चरणों के लिए जारी कार्यक्रमों को पूरे आयोग की सहमति प्राप्त थी। उन्होंने कहा कि ऐसे में आयोग की निष्पक्षता और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है। निर्वाचन आयोग की मौजूदा वेबसाइट पर ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी निर्वाचन आयुक्त के रूप में दर्ज हैं। महापौर ने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को SIR या किसी नीतिगत निर्णय से जोड़कर देखा जाना सही नहीं है। निर्वाचन आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि यह पत्र प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से संबंधित आंतरिक विषय था, न कि किसी चुनावी नीति या SIR से जुड़ा मामला।

गजराज बिष्ट ने कहा कि SIR से संबंधित फॉर्म-6 और उसके घोषणापत्र को लेकर भी भ्रम फैलाया जा रहा है। उनके मुताबिक आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR से संबंधित प्रक्रिया में निर्धारित घोषणापत्र लागू है, जबकि गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए संबंधित नियमों के तहत प्रक्रिया जारी रहती है। निर्वाचन आयोग की पूर्व जारी सामग्री में भी SIR के दौरान फॉर्म-6 उपलब्ध कराने और मतदाता पंजीकरण की व्यवस्था का उल्लेख है। महापौर ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग की ओर से स्पष्टीकरण सामने आने के बाद विपक्ष को तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन पर चर्चा तथ्यों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी मतदाता सूची को अद्यतन रखने और पात्र नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की है।

आयोग ने हालिया स्पष्टीकरण में छूटे मतदाताओं, रैन बसेरों, मजदूरों और बेघर लोगों तक पहुंच बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाओं की भी जानकारी दी है। प्रेसवार्ता में महापौर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा अतीत में EVM, निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और अन्य संस्थाओं को लेकर दिए गए बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस से संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए जाने वाले आरोपों को लेकर तथ्यों के आधार पर जवाब देने की मांग की। हालांकि, इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की अपनी आपत्तियां और राजनीतिक दावे रहे हैं। SIR को लेकर भी निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण के बावजूद राजनीतिक बहस जारी है। महापौर गजराज सिंह बिष्ट ने कहा कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विषयों पर जनता के बीच सही जानकारी पहुंचाना जरूरी है और राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं के संबंध में अपने दावों को तथ्य और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर रखना चाहिए।
