देहरादून। उत्तराखण्ड उपनल संविदा कर्मचारी संघ ने सैनिक कल्याण विभाग द्वारा जारी नए अनुबंध संबंधी शासनादेश का कड़ा विरोध करते हुए इसे कर्मचारियों के हितों और उच्च न्यायालय की भावना के विपरीत बताया है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर नया अनुबंध करने संबंधी आदेश वापस नहीं लिया गया तो कर्मचारी संगठन कानूनी लड़ाई के साथ-साथ लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने को मजबूर होगा। संघ की ऑनलाइन बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि सैनिक कल्याण विभाग के सचिव द्वारा जारी शासनादेश में सभी विभागों में कार्यरत उपनल कर्मचारियों से एक सप्ताह के भीतर नया अनुबंध करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि माननीय उच्च न्यायालय की जनहित याचिका संख्या 116/2018 के निर्णय में ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
संगठन का कहना है कि न्यायालय का फैसला समान कार्य के लिए समान वेतन और प्रचलित नियमों के तहत नियमितीकरण से संबंधित है, न कि कर्मचारियों से नए सिरे से अनुबंध कराने के लिए। बैठक में यह भी कहा गया कि अवमानना याचिका संख्या 402/2024 एवं 637/2025 की सुनवाई के दौरान संगठन के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने प्रस्तावित अनुबंध का न्यायालय में स्पष्ट विरोध किया था। इसके बावजूद कर्मचारियों पर नए अनुबंध का दबाव बनाया जाना न्यायालय के आदेशों की भावना के विपरीत है। संगठन ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि शासनादेश वापस नहीं लिया गया और कर्मचारियों पर नया अनुबंध थोपने का प्रयास जारी रहा तो प्रदेशभर के उपनल कर्मचारी कानूनी कार्रवाई के साथ व्यापक लोकतांत्रिक कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे। ऑनलाइन बैठक में रमेश शर्मा, गणेश गोस्वामी, प्रमोद गुसाईं, मनोज जोशी, पूरन चन्द्र भट्ट, मनोज गड़कोटी, नितिन कुमार, तेजा सिंह बिष्ट, संदीप कुमार, अनिल कोटियाल, विनोद बिष्ट सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।






