देहरादून। प्रदेश में न्यायालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत और अभेद्य बनाने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय, उत्तराखण्ड ने सभी जनपदों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि न्यायाधीशों, न्यायालयों और न्यायालय परिसरों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और चिन्हित कमियों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाए। जारी निर्देशों के तहत सभी जिलों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित न्यायालय परिसरों में पर्याप्त पुलिस और पीएसी बल की तैनाती आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के साथ करने को कहा गया है। न्यायालय परिसरों में प्रवेश और निकासी को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए पहचान पत्र के आधार पर प्रवेश व्यवस्था लागू करने तथा अनाधिकृत व्यक्तियों की आवाजाही पर सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रवेश द्वारों पर स्क्रीनिंग व्यवस्था को मजबूत करने, बैरियर लगाकर एक्सेस कंट्रोल सुनिश्चित करने और स्थानीय अभिसूचना इकाई को सक्रिय रखने को कहा गया है।

पुलिस मुख्यालय ने वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए न्यायाधीशों और न्यायालयों की सुरक्षा में तैनात कर्मियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। संभावित आतंकवादी घटनाओं और बम हमलों के खतरे को ध्यान में रखते हुए क्विक रिस्पॉन्स टीम और एटीएस की तैनाती सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। न्यायालयों की कार्यवाही शुरू होने से पहले नियमित रूप से बम डिस्पोजल दस्ते और डॉग स्क्वाड द्वारा एंटी सबोटाज चेकिंग कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके अलावा न्यायालय परिसरों में लगे सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखने, नियमित पेट्रोलिंग करने, ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की समय-समय पर चेकिंग करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मॉक ड्रिल तथा इमरजेंसी एग्जिट प्लान तैयार रखने को अनिवार्य किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने को कहा है।







