देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में बजट सत्र की अवधि को लेकर नया मुद्दा गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आगामी विधानसभा बजट सत्र को न्यूनतम 21 दिनों तक और कम से कम तीन सोमवारों सहित आहूत किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही विधानसभा के माध्यम से ही सुनिश्चित होती है और प्रश्नकाल इसकी सबसे सशक्त कड़ी है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्तमान पंचम विधानसभा के गठन के बाद अब तक नौ सत्र आयोजित हुए, जिनमें कुल 32 कार्य दिवस ही हो पाए। हैरानी की बात यह रही कि इन उपवेशनों में एक भी सोमवार प्रश्नकाल सहित निर्धारित नहीं हुआ, जबकि परंपरागत रूप से सोमवार का दिन मुख्यमंत्री के अधीन विभागों से जुड़े प्रश्नों के लिए तय रहता है।
यशपाल आर्य ने ध्यान दिलाया कि मुख्यमंत्री के पास लगभग 40 महत्वपूर्ण विभाग हैं, जिनमें गृह, आपदा प्रबंधन, ऊर्जा, पेयजल, शहरी विकास, औद्योगिक विकास और भ्रष्टाचार उन्मूलन जैसे अहम विषय शामिल हैं। सोमवार को प्रश्नकाल न होने के कारण कानून-व्यवस्था, आपदा तैयारियों, पेयजल और बिजली आपूर्ति जैसे ज्वलंत मुद्दों पर समुचित चर्चा और जवाबदेही नहीं हो पाई है। उन्होंने यह भी कहा कि बजट सत्र में वित्तीय कार्यवाही, अनुदान मांगों पर चर्चा और वित्त विधेयक जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार होना है, ऐसे में सत्र की अवधि पर्याप्त होना अत्यंत आवश्यक है। आर्य ने आग्रह किया कि 21 दिवसीय सत्र और तीन सोमवार सुनिश्चित कर लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत किया जाए, ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी बहस हो सके और सरकार की जवाबदेही तय हो।






