देहरादून। दमुवाढूंगा की जनता के वर्षों से लंबित मालिकाना हक के मुद्दे पर आखिरकार सरकार बैकफुट पर आ गई है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया द्वारा दायर जनहित याचिका के दबाव और उच्च न्यायालय में 22 अगस्त को होने वाली सुनवाई से ठीक एक दिन पहले सरकार ने 21 अगस्त को अधिसूचना जारी कर 13 मई 2020 को लगाई गई रोक हटाने का फैसला किया। आज कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया ने कहा कि यह फैसला जनता और लोकतंत्र की जीत है। उन्होंने याद दिलाया कि 20 दिसंबर 2016 को कांग्रेस सरकार ने अधिसूचना जारी कर दमुवाढूंगा को मालिकाना हक देने के लिए सर्वेक्षण एवं अभिलेख क्रियाओं को शुरू किया था, लेकिन 13 मई 2020 को तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी, जिससे लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
बल्यूटिया ने बताया कि उन्होंने 2021 में भाजपा सरकार की अधिसूचना के खिलाफ उच्च न्यायालय में रिट दायर की थी, जिसका सरकार ने हर बार विरोध किया। लेकिन उच्च न्यायालय में सुनवाई से ठीक एक दिन पहले अधिसूचना जारी होना इस बात का सबूत है कि सरकार ने दबाव में यह कदम उठाया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जो बोर्ड लोगों की जमीन पर अवैध तरीके से लगाए गए थे, उन्हें किस नियम के तहत लगाया गया और उन्हें कब हटाया जाएगा। बल्यूटिया ने साफ कहा कि यदि सरकार ईमानदार है, तो वह अधिसूचना पर तत्काल अमल करे और दमुवाढूंगा की जनता को मालिकाना हक दिलाने में अब और देरी न करे। उन्होंने कहा कि 2016 से 2025 तक पूरे नौ साल लोगों को उनके अधिकारों से वंचित रखना लोकतंत्र के साथ अन्याय है और अब सरकार को जनता के हक में ठोस कदम उठाने होंगे।












