- राज्यभर में आपदा नियंत्रण के निर्देश सख्ती से लागू
देहरादून। प्रदेश में आगामी चार दिनों तक भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी के मद्देनज़र राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र ने समस्त जिलाधिकारियों को अलर्ट जारी करते हुए सख्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार, 29 और 30 जून को देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, चम्पावत और ऊधम सिंह नगर में कुछ स्थानों पर अत्यंत तीव्र वर्षा के आसार हैं, जिसे लेकर रेड अलर्ट घोषित किया गया है। शेष जनपदों में ऑरेंज अलर्ट प्रभावी रहेगा। इसके साथ ही 1 और 2 जुलाई को प्रदेश के सभी जनपदों में तेज बारिश की संभावना है, जबकि 3 जुलाई को बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और नैनीताल में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। इन पूर्वानुमानों को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने समस्त जनपद प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि राज्य भर में हर स्तर पर सतर्कता और त्वरित आपदा प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मोटर मार्ग के बाधित होने की स्थिति में संबंधित निर्माण एजेंसियां एनएच, पीएमजीएसवाई, पीडब्ल्यूडी, बीआरओ, एडीबी, डब्ल्यूबी, सीपीडब्ल्यूडी आदि तत्काल मार्ग खोलने की कार्रवाई करें। वहीं, राजस्व उपनिरीक्षक, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी अपने क्षेत्रों में तैनात रहेंगे और चौकियां-थाने पूरी तरह हाई अलर्ट पर रहेंगे। आपदा से जुड़ी हर परिस्थिति के लिए वायरलेस सेट, बारिश से बचाव सामग्री, टॉर्च, हेलमेट जैसी जरूरी सामग्री की व्यवस्था सभी अधिकारियों को अपने स्तर से सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही, आपात स्थिति में खाद्य सामग्री व दवाओं की व्यवस्था और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया है।

अत्यधिक बारिश की चेतावनी के मद्देनज़र उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की हिदायत भी दी गई है। जिला सूचना अधिकारियों को चेतावनियों का प्रसारण दृश्य और प्रिंट मीडिया के माध्यम से आमजन तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आपदा अथवा दुर्घटना की सूचना तत्काल राज्य नियंत्रण कक्ष फोन नंबर 0135-2710335, 0135-2710334, टोल फ्री 1070, मोबाइल 9058441404 व 8218867005 पर पहुंचाई जाए, ताकि यथाशीघ्र राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।






