एजेंसी/नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सरोवर नगरी नैनीताल में जिला अस्पताल की भूमि पर अतिक्रमण के मामले में बुधवार को कोई राहत नहीं दी है। अदालत ने सभी अतिक्रमणकारियों के प्रार्थना पत्र खारिज कर दिये। अब जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाने के लिये स्वतंत्र है।मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी की अगुवाई वाली पीठ ने अशोक कुमार साह बनाम राज्य सरकार मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पिछले महीने 22 अगस्त को बीडी पांडे जिला अस्पताल की भूमि से तत्काल अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिये थे। इसके बाद जिला प्रशासन अतिक्रमण को चिन्हित करने में जुट गया था। इसी क्रम में अतिक्रमणकारियों की ओर से आज 22 अगस्त के आदेश को वापस लेने के लिये रिकॉल प्रार्थना पत्र दायर किया गया। अतिक्रमणकारियों की ओर से कहा गया कि उच्चतम न्यायालय ने हाइकोर्ट में अपना पक्ष रखने के निर्देश दिये। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि प्रशासन की ओर से उनके बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश जारी कर दिये गये हैं। कुछ अतिक्रमणकारियों की ओर से कहा गया कि उनका वाद सिविल न्यायालय में लंबित है।
अदालत ने अतिक्रमणकारियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत के सख्त रूख के बाद अब अतिक्रमण हटाने का रास्ता साफ हो गया है।
अशोक साह बनाम राज्य सरकार मामले में सरकार की ओर से कहा गया कि बीडी पांडे जिला अस्पताल की 1.49 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। जगह की कमी के चलते सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने वर्ष 2015 एक आदेश जारी कर अस्पताल की भूमि को खाली से अतिक्रमणकारियों को हटाने के निर्देश दिये थे। इस आदेश के खिलाफ कुछ अतिक्रमणकारी उच्चतम न्यायालय पहुुंच गये लेकिन शीर्ष अदालत ने उन्हें कोई राहत नहीं देते हुए जिलाधिकारी के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। दूसरी ओर प्रशासन की ओर से अतिक्रमणकारियों को चिन्हित करने के साथ ही उन्हें भूमि खाली करने का नोटिस जारी कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिये पूरी तैयारी कर ली गयी है।






