नैनीताल। हल्द्वानी के गौलापार में प्रस्तावित अंतरराज्यीय बस टर्निमल (आईएसबीटी) के मामले पर उच्च न्यायालय ने कड़ा रूख अपनाते हुए प्रदेश सरकार से चौबीस घंटे के अदंर आईएसबीटी के शिफ्ट होने को लेकर असली कारण बताने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की पीठ में हल्द्वानी निवासी रवि शंकर जोशी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इससे पूर्व प्रदेश सरकार ने आईएसबीटी से जुड़े सभी दस्तावेज सील बंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश किये थे। अदालत ने उनका परीक्षण किया।
याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार आईएसबीटी के शिफ्टिंग को लेकर अभी तक ठोस कारण पेश नहीं कर पायी है। गौलापार में प्रस्तावित आईएसबीटी के लिये भूमि के समतलीकरण और अन्य कार्यों पर लगभग 11 करोड़ की धनराशि खर्च की जा चुकी है। वहीं प्रस्तावित भूमि पर 2625 पेड़ भी काटे जा चुके हैं। सरकार गौलापार से आईएसबीटी को हल्द्वानी के तीन पानी में बनाने की योजना बना रही है।
मुख्य स्थायी अधिवक्ता (सीएससी) चंद्रशेखर रावत ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार प्रस्तावित भूमि पर महत्वपूर्ण संस्थान लाने की तैयारी कर रही है। वहीं खर्च की गयी 11 करोड़ में से अधिकांश धनराशि वापस ली जा चुकी है। साथ ही काटे गये पेड़ों के बदले में अन्यत्र पेड़ लगाने की योजना है। उनके तर्कों से अदालत संतुष्ट नजर नहीं आयी। अदालत ने प्रदेश सरकार को चौबीस घंटे की मोहलत देते हुए सरकार को आईएसबीटी शिफ्ट करने का वास्तविक कारण बताने को कहा है।







